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लाखों विवाद सुलझे, करोड़ों का सेटलमेंट; लोक अदालत में पक्षकारों को बड़ी राहत

हापुड़। जनपद हापुड़ में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों के समाधान का बड़ा मंच बनी। न्यायालयों, बैंकों, राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों से जुड़े 2,89,956 मामलों का निस्तारण सुलह-समझौते के आधार पर किया गया। इन मामलों में कुल 5 करोड़ 10 लाख 72 हजार 596 रुपये का सेटलमेंट हुआ।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह प्रथम ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पार्चन एवं माल्यार्पण के साथ किया।इस दौरान न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी, न्यायिक कर्मचारी और बड़ी संख्या में वादकारी मौजूद रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार जनपद के विभिन्न न्यायालयों द्वारा 5,037 वादों का निस्तारण किया गया। इनमें 2 करोड़ 84 लाख 67 हजार 596 रुपये का सेटलमेंट हुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सौरभ कुमार वर्मा ने अकेले 3,354 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण किया और 2,25,030 रुपये अर्थदंड वसूल किया। अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत अवनीश कुमार राय ने 290 वादों का निस्तारण किया।

लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से जुड़े मामलों में भी पीड़ितों को बड़ी राहत मिली। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी गुरप्रीत सिंह बावा ने 26 मामलों का निस्तारण करते हुए 2 करोड़ 9 लाख 35 हजार रुपये का सेटलमेंट कराया।

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परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश पीयूष पाण्डेय ने 42 मामलों का निस्तारण किया। इनमें छह दंपतियों के बीच समझौता कराया गया और उन्हें सुखमय वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत के लिए न्यायालय कक्ष से साथ विदा किया गया। वहीं 12 मामलों में वादकारियों को संपूर्ण भरण-पोषण की धनराशि दिलाई गई।
इसके अलावा गढ़मुक्तेश्वर में 313 मामलों तथा ग्राम न्यायालय धौलाना में 45 मामलों का निस्तारण किया गया। अलग-अलग त्वरित एवं अधीनस्थ न्यायालयों में भी सैकड़ों मामलों का समाधान कराया गया।

बैंकों द्वारा लगाए गए 350 प्री-लिटिगेशन मामलों में से 167 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण हुआ। इनमें 2 करोड़ 26 लाख 5 हजार रुपये का सेटलमेंट हुआ, जबकि 75 लाख 24 हजार रुपये नकद प्राप्त किए गए। लोक अदालत से पहले हुई समीक्षा बैठक में भी बैंकों को लोन रिकवरी से जुड़े मामलों को अधिक से अधिक लोक अदालत में निस्तारित कराने के निर्देश दिए गए थे।
राजस्व, पुलिस एवं अन्य विभागों द्वारा संयुक्त रूप से 2,84,752 मामलों का निस्तारण किया गया। इस तरह न्यायालयों, बैंकों और विभिन्न विभागों के स्तर पर बड़ी संख्या में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान हुआ।

जनपद न्यायाधीश अजय कुमार सिंह प्रथम ने कहा कि लोक अदालत में निस्तारित होने वाले मामलों में दोनों पक्षकारों की जीत होती है। आपसी सहमति से विवाद समाप्त होने पर पक्षकारों का समय और धन दोनों बचता है तथा वर्षों से चले आ रहे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव होता है। उन्होंने लोक अदालत के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, वादकारियों और पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।

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राष्ट्रीय लोक अदालत का प्रबंधन अपर जिला जज एवं नोडल अधिकारी अवनीश कुमार राय की देखरेख में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डॉ. ब्रह्मपाल सिंह द्वारा किया गया। डॉ. ब्रह्मपाल सिंह ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, पीएलवी और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

लोक अदालत में सामने आए आंकड़ों ने यह भी दिखाया कि सुलह-समझौते के माध्यम से केवल मुकदमों का निस्तारण ही नहीं हुआ, बल्कि पारिवारिक विवादों में रिश्ते जोड़ने और सड़क हादसों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को आर्थिक राहत दिलाने का भी काम हुआ।
एक जरूरी सुधार: ताजा रिपोर्ट में “2.84 लाख मामले” को राजस्व, पुलिस और अन्य विभागों के संयुक्त निस्तारण के रूप में अलग से बताया गया है; इसे कुल 2,89,956 में शामिल मानकर ही खबर लिखना बेहतर है, ताकि आंकड़ा दो बार न गिना जाए। �
रॉयल बुलेटिन