राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma

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प्रधान गए, विकास की रफ्तार थमी… फाइलों में कैद गांवों की तरक्की

26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म, करोड़ों रुपये के विकास प्रस्ताव मंजूरी के इंतजार में; सड़क, नाली और जल निकासी के काम अटके

हापुड़। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होते ही जिले के गांवों में विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में प्रस्तावित विकास कार्य अब कागजों और सरकारी फाइलों के बीच अटककर रह गए हैं।

करोड़ों रुपये की लागत वाले सड़क, नाली, जल निकासी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद उन्हें स्वीकृति का इंतजार है। ऐसे में गांवों की बदहाल व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने की उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है।प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले और उसके बाद गांवों में विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए गए थे।

इनमें जर्जर रास्तों की मरम्मत, नई सड़कों का निर्माण, नालियों का निर्माण और मरम्मत, जल निकासी की व्यवस्था, सफाई व्यवस्था समेत ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कई काम शामिल हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।जर्जर रास्ते और जलभराव बने परेशानी जिले के कई गांवों में लंबे समय से खराब पड़े रास्ते ग्रामीणों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें, बंद नालियां और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली तो जलभराव और आवागमन की समस्या और विकराल हो सकती है।

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करोड़ों के प्रस्ताव, मगर काम जमीन पर नहींगांवों की जरूरतों के आधार पर करोड़ों रुपये के विकास प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन प्रस्तावों में कई ऐसे कार्य भी शामिल हैं, जिनकी ग्रामीण लंबे समय से मांग कर रहे हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद स्वीकृति और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।प्रशासन की मंजूरी पर टिकी निगाहें प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में विकास कार्यों को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर निर्णय का इंतजार है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि विकास प्रस्तावों को कब स्वीकृति मिलती है और कब धरातल पर काम शुरू होता है।

ग्रामीणों की मांग है कि जरूरी विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी देकर जल्द काम शुरू कराया जाए, ताकि गांवों की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सके।फिलहाल, प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद गांवों में विकास की कमान भले ही प्रशासनिक प्रक्रिया के हाथ में आ गई हो, लेकिन करोड़ों रुपये के प्रस्तावों की फाइलें आगे बढ़ने का इंतजार कर रही हैं। अब देखना होगा कि इन प्रस्तावों को मंजूरी कब मिलती है और गांवों में रुके विकास कार्य कब जमीन पर दिखाई देते हैं।

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