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अन्याय के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़े जटायु, रामचरितमानस पाठ में गूंजा धर्म और कर्तव्य का संदेश

पिलखुवा, हापुड़। जनपद हापुड़ के पिलखुवा नगर पालिका क्षेत्र के मोहल्ला सर्वोदय नगर में रविवार को धार्मिक आस्था और भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन किया गया। सुरेंद्र कुमार वर्मा के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में कथा व्यास रामकेश सिंह तोमर ने अरण्यकांड की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम के वनवास, माता सीता के हरण और जटायु के रावण से युद्ध के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया।

अरण्यकांड के प्रसंगों में छिपा जीवन का संदेश

कथा व्यास रामकेश सिंह तोमर ने भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर माता सीता के हरण तक के प्रसंगों को विस्तार से सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का वनवास त्याग, मर्यादा, धैर्य और कर्तव्य पालन का ऐसा उदाहरण है, जो कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान श्रद्धालु पूरी तन्मयता से धार्मिक प्रसंग सुनते रहे और भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संदेश ग्रहण करते रहे।

माता सीता की रक्षा को रावण से भिड़े जटायु

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कथा व्यास ने माता सीता के हरण के दौरान जटायु और रावण के बीच हुए संघर्ष का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लेकर जा रहा था, तब वृद्ध जटायु ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना रावण का मार्ग रोक लिया। माता सीता की रक्षा के लिए जटायु ने रावण से युद्ध किया और गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी धर्म तथा कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। उनका यह साहस कथा में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा।

जटायु का त्याग बना धर्मनिष्ठा की अमर मिसाल

रामकेश सिंह तोमर ने कहा कि जटायु का चरित्र धर्म, त्याग, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसका विरोध किया। जटायु का जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए मनुष्य को अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनका त्याग और साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

माता सीता ने आभूषण गिराकर छोड़ा महत्वपूर्ण संकेत

कथा के दौरान माता सीता द्वारा अपने आभूषण नीचे गिराए जाने का प्रसंग भी भावपूर्ण ढंग से सुनाया गया। कथा व्यास ने बताया कि रावण जब माता सीता को लेकर जा रहा था, तब उन्होंने मार्ग में पर्वत की चोटी पर लोगों को देखकर अपने आभूषण नीचे गिराए, ताकि आगे चलकर उनके बारे में कोई सुराग मिल सके। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और कथा स्थल पर कुछ समय के लिए भावुक वातावरण बन गया।

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जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा कथा स्थल

श्रीरामचरितमानस पाठ के दौरान सर्वोदय नगर का वातावरण पूरी तरह राममय बना रहा। कथा के बीच श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिभाव से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और जटायु के त्याग से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह, आस्था और भक्ति का भाव दिखाई दिया।

श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर लिया धार्मिक आयोजन में हिस्सा

कार्यक्रम में जगदीश भारद्वाज, वीर सैन बंसल, मूलचंद गुप्ता, सुधीर गोयल, अखिलेश मित्तल, महेश चंद्र शर्मा, अजय गोयल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजकों की ओर से सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और धार्मिक आयोजन में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने रामचरितमानस के पाठ और कथा श्रवण में बढ़-चढ़कर सहभागिता की।