राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
गांव की चौखट से रोजगार की नई उड़ान, लालपुर में खाद्य प्रसंस्करण कार्यक्रम से जगी आत्मनिर्भरता की उम्मीद
सरकारी योजना ने खोला स्वरोजगार का रास्ता, ग्रामीणों को मिली आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह
हापुड़। अब गांव के हुनर को कारोबार का रूप देने और स्थानीय उत्पादों से आय का नया जरिया तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्राम लालपुर में सोमवार को मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू करने, खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने तथा योजना के माध्यम से मिलने वाली सरकारी सहायता की विस्तृत जानकारी दी गई। खास बात यह रही कि पात्र लाभार्थियों को इकाई स्थापित करने पर एक लाख रुपये तक के अनुदान की जानकारी दी गई, जिससे ग्रामीणों में स्वरोजगार को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
योजना का उद्देश्य—गांव में उपलब्ध उत्पादों को कारोबार में बदलना
मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कृषि एवं खाद्य उत्पादों का प्रसंस्करण कर उन्हें मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है। यानी किसान और ग्रामीण केवल कच्चे उत्पाद बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि उन उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
इकाई स्थापित कर खुद बनें रोजगार देने वाले
कार्यक्रम में ग्रामीणों को समझाया गया कि खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी छोटी-छोटी इकाइयां स्थापित कर गांव में ही स्वरोजगार की शुरुआत की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों से संबंधित कारोबार शुरू होने पर न केवल इकाई संचालक को आय का साधन मिल सकता है, बल्कि आगे चलकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
एक लाख रुपये तक के अनुदान की जानकारी ने बढ़ाया हौसला
विजेंद्र सिंह, प्रभारी हापुड़ ने ग्रामीणों को योजना के अंतर्गत मिलने वाली सहायता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के इच्छुक पात्र लाभार्थियों को एक लाख रुपये तक के अनुदान का लाभ मिल सकता है। इस सहायता का उद्देश्य इच्छुक ग्रामीणों को अपनी खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना है।
कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक—कमाई बढ़ाने का अवसर
योजना के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कृषि एवं खाद्य उत्पादों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण करके तैयार उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाया जाए तो उत्पाद की उपयोगिता और कारोबारी संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सरकारी योजना के साथ प्रशिक्षण भी, ताकि कदम मजबूत हों
कार्यक्रम में केवल योजना की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि प्रतिभागियों को खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित प्रशिक्षण सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य इच्छुक ग्रामीणों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आवश्यक जानकारी देकर उन्हें अपनी इकाई शुरू करने की दिशा में तैयार करना रहा। प्रतिभागियों को स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों पर भी जानकारी दी गई।
फीता काटकर हुआ शुभारंभ, गणमान्य लोगों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम प्रधान कमलेश ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्रभारी परमेंद्र कुमार, सेवानिवृत्त प्रभारी सुशील कुमार सिरोही, रूपकिशोर शर्मा तथा अरुण कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने ग्रामीणों को योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
रोजगार की तलाश नहीं, रोजगार का निर्माण बने लक्ष्य
कार्यक्रम में ग्रामीणों को संदेश दिया गया कि सरकारी योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग कर गांव में ही व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ग्रामीणों को अपनी क्षमता और स्थानीय उत्पादों के आधार पर नई इकाई स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
लालपुर में आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत, गांव से निकल सकती हैं रोजगार की नई राहें
मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीणों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सरकारी सहायता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया। योजना के माध्यम से ग्रामीणों को अपने स्थानीय संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग करने और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। लालपुर में शुरू हुआ यह अभियान आने वाले समय में ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने और गांव में ही रोजगार के नए अवसर खड़े करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
