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संस्कारवान युवा ही बदलेंगे राष्ट्र का भविष्य, आर्य समाज मंच से गूंजा संदेश

पिलखुवा। आर्य समाज मंदिर में चल रहे वार्षिक उत्सव के दूसरे दिन वैदिक विचारों और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गुजरात से आए वैदिक विद्वान योगेश जी वैदिक ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में समाज अपने मूल संस्कारों से दूर होता जा रहा है, जिसके कारण परिवार और समाज दोनों स्तरों पर कई प्रकार की चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि यदि समाज को सही दिशा देनी है तो युवाओं को संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से जोड़ना होगा।उन्होंने कहा कि केवल भौतिक प्रगति ही जीवन का उद्देश्य नहीं हो सकती। जीवन में सफलता के साथ चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। आज के समय में बच्चों को शिक्षा तो मिल रही है, लेकिन संस्कारों का पक्ष कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

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ऐसे में परिवारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। माता-पिता को बच्चों के सामने अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल्यों को समझ सके।योगेश जी वैदिक ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव संस्कारवान युवाओं से ही रखी जा सकती है।

उन्होंने उपस्थित लोगों से वैदिक सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने और समाज में नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन नहीं लाएगा, तब तक समाज में व्यापक बदलाव संभव नहीं है।कार्यक्रम में भजन उपदेशक कुलदीप विद्यार्थी ने भजनों के माध्यम से वैदिक धर्म, समाज सुधार और स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का संदेश दिया।

उनके भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कार्यक्रम के दौरान वैदिक यज्ञ, सत्संग और विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।वार्षिक उत्सव में आर्य समाज के पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी रही।

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इस अवसर पर संरक्षक सुभाष चंद्र आर्य, प्रधान अशोक आर्य, सत्य प्रकाश आर्य, हीरालाल आर्य, वीर सिंह आर्य, अंश कंसल, समाजसेवी सुनील गर्ग लोहे वाले, विजय आर्य, निशिकांत माहेश्वरी समेत अनेक गणमान्य नागरिक और आर्यजन उपस्थित रहे।