राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
गणपति के चरणों में झुके सैकड़ों शीश, गुल्लू बाबा मंदिर में भक्ति का अद्भुत नजारा
दस दिवसीय गणेश महोत्सव में आस्था का सैलाब, सुबह-शाम आरती के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु, शहर में जगह-जगह सजे गणपति पंडालों में भी भक्ति की धूम
हापुड़, पिलखुवा। विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश के दस दिवसीय महोत्सव को लेकर पिलखुवा नगर इन दिनों श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। शहर में विभिन्न संस्थाओं द्वारा जगह-जगह गणपति महाराज की प्रतिमाएं विधि-विधान के साथ विराजमान की गई हैं। गुल्लू बाबा मंदिर में स्थापित गणेश जी महाराज की प्रतिमा के समक्ष प्रतिदिन सुबह और शाम होने वाली आरती में सैकड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ पहुंच रहे हैं।
आरती के समय गणपति बप्पा के जयकारों, घंटियों की गूंज और भक्ति में लीन श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठता है। भक्तों की भीड़ का आलम यह है कि मंदिर परिसर में स्थान कम पड़ने पर लोग बाहर तक खड़े होकर आरती में शामिल होते हैं।
गणपति महाराज के चरणों में झुकते शीश और मंगलकामनाओं के साथ उठते हाथ महोत्सव की आध्यात्मिक गरिमा को और गहरा कर रहे हैं।आरती के लिए लगती हैं कतारें, बारी-बारी से गणपति महाराज की आराधना करते हैं भक्त गुल्लू बाबा मंदिर में प्रातः और सायंकाल आरती का समय श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आरती शुरू होने से पहले ही भक्त गणेश प्रतिमा के समक्ष आरती करने के लिए कतार में खड़े हो जाते हैं।
सभी श्रद्धालुओं को बारी-बारी से आरती करने का अवसर प्रदान किया जाता है, जिससे प्रत्येक भक्त भगवान गणेश के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर सके। हाथों में आरती की थाली लेकर भक्त जब विघ्नविनाशक गणपति की आराधना करते हैं, तो वातावरण भक्तिभाव से भर उठता है। इस दौरान गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से मंदिर परिसर गूंजता रहता है।
आरती में शामिल होने के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों तक विशेष उत्साह दिखाई देता है।मंदिर परिसर से बाहर तक उमड़ती भीड़, जयकारों और घंटियों से भक्तिमय वातावरण गणपति महाराज की आरती के समय गुल्लू बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रहती है। मंदिर परिसर में जगह कम पड़ने पर अनेक भक्त बाहर खड़े होकर आरती में अपनी सहभागिता निभाते हैं।
दीपों की ज्योति, धूप-अगरबत्ती की सुगंध, घंटियों की ध्वनि और सामूहिक जयघोष से मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक अनुभूति से भर जाता है। श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं और आरती के माध्यम से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्रतिदिन होने वाले इस धार्मिक आयोजन ने मंदिर को गणेश उत्सव के दौरान आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है।भोग और प्रसाद के साथ मंगलकामनाएं, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की प्रार्थना आरती संपन्न होने के बाद भगवान श्री गणेश को श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित किया जाता है।
इसके पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसे भक्त भगवान का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं। गणपति महाराज के समक्ष शीश नवाकर श्रद्धालु अपने और अपने परिवार की सुरक्षा, सुख-शांति, उन्नति और समृद्धि की कामना करते हैं। भक्त विघ्नहर्ता से जीवन के संकट दूर करने, परिवार में खुशहाली बनाए रखने और घर-परिवार पर मंगल कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक आस्था से ओतप्रोत यह क्रम गणेश महोत्सव के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं को मंदिर से जोड़ रहा है।शहर में जगह-जगह विराजमान गणपति, पंडालों में भी सुबह-शाम गूंज रही आरतीगुल्लू बाबा मंदिर के साथ-साथ पिलखुवा शहर में विभिन्न स्थानों पर संस्थाओं द्वारा स्थापित गणपति पंडालों में भी श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। जगह-जगह विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमाओं के समक्ष श्रद्धालु पूजा-अर्चना, आरती और भोग अर्पण कर रहे हैं।
सुबह और शाम धार्मिक आयोजनों में लोगों की सहभागिता बढ़ रही है। गणपति पंडालों में सजावट, आरती और प्रसाद वितरण के माध्यम से महोत्सव की रौनक दिखाई दे रही है। परिवार के साथ दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान गणेश के समक्ष मंगलकामनाएं कर रहे हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में गणपति बप्पा के जयकारे धार्मिक उत्साह को और प्रबल बना रहे हैं।
दस दिवसीय गणेश महोत्सव में आस्था और परंपरा का संगम पिलखुवा नगर में चल रहा गणेश महोत्सव धार्मिक परंपरा, सामूहिक सहभागिता और श्रद्धा का संगम प्रस्तुत कर रहा है। विभिन्न संस्थाओं द्वारा विराजमान की गई गणेश प्रतिमाओं के समक्ष नियमित आरती और पूजन का आयोजन किया जा रहा है।
गुल्लू बाबा मंदिर में उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और शहर के गणपति पंडालों में दिखाई दे रही धार्मिक गतिविधियां उत्सव की व्यापकता को दर्शाती हैं। श्रद्धालु गणपति महाराज की आराधना कर अपने तथा परिवार के मंगल, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। दस दिवसीय महोत्सव के दौरान पिलखुवा में भक्ति की यह धारा निरंतर प्रवाहित हो रही है।
