राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

मासिक समीक्षा बैठक में गोवंश संरक्षण पर प्रशासन सख्त, इसी माह शुरू होंगे वृहद गो संरक्षण केंद्र

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हापुड़। निराश्रित गोवंशों की देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही अब प्रशासन को मंजूर नहीं होगी। गो आश्रय स्थलों में जलभराव और कीचड़ से लेकर गोवंशों के लिए पौष्टिक चारे और बीमारियों से बचाव तक, हर व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने गोवंश संरक्षण को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देते हुए व्यवस्थाओं को धरातल पर मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में उनकी अध्यक्षता में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में गो आश्रय स्थलों की स्थिति से लेकर निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों तक की विस्तृत समीक्षा की गई।
वर्षा ऋतु में गो आश्रय स्थलों में जलभराव और कीचड़ की समस्या को लेकर जिलाधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आश्रय स्थल में पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार मिट्टी भराव कराने और खड़ंजा लगवाने के निर्देश दिए गए, जिससे गोवंशों को सुरक्षित और साफ स्थान मिल सके।

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गोवंशों के भोजन की गुणवत्ता पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। जिलाधिकारी ने गो आश्रय स्थल संचालकों को निर्देशित किया कि हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता के लिए किसानों से अनुबंध किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि हरे चारे में यूरिया और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल न हो। चारे की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने के निर्देश दिए गए।

लम्पी बीमारी की रोकथाम को लेकर भी पशु चिकित्सा विभाग को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए। पशु चिकित्साधिकारियों को सभी ग्रामों में टीकाकरण अभियान चलाने के साथ गोवंशों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि लम्पी बीमारी के कारण किसी भी गोवंश की मृत्यु नहीं होनी चाहिए।

बैठक में निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों की प्रगति की भी समीक्षा हुई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओपी मिश्रा ने शेखपुर खिचरा द्वितीय, तृतीय, हिण्डालपुर, हिम्मतपुर और पारपा में निर्माणाधीन केंद्रों की जानकारी दी। बताया गया कि पारपा, हिण्डालपुर और हिम्मतपुर में निर्माण कार्य करीब 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

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जिलाधिकारी ने निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए निर्देश दिए कि शेष कार्य जल्द पूरा कर इसी माह वृहद गो संरक्षण केंद्रों का संचालन शुरू कराया जाए। नए केंद्रों के संचालन से निराश्रित गोवंशों के लिए अतिरिक्त संरक्षण क्षमता उपलब्ध होगी और मौजूदा आश्रय स्थलों पर दबाव भी कम होगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, उप कृषि निदेशक तथा गो आश्रय स्थलों के संचालक मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बैठक में दिए गए निर्देशों का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।