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पॉक्सो से गैंगस्टर तक… हर गंभीर केस में मजबूत पैरवी का फरमान, डीएम ने दिए सख्त निर्देश

महिला अपराध और जघन्य मामलों में त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई पर जोर, गवाहों की समय से पेशी और पुलिस-अभियोजन के बेहतर तालमेल के निर्देश

हापुड़। अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के बाद अब अदालत में भी कानून की पकड़ कमजोर न पड़े, इसके लिए प्रशासन ने अभियोजन की पैरवी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मुकदमों में आरोपियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने के साथ दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में हुई अभियोजन कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक में लंबित मुकदमों से लेकर दोषसिद्धि दर तक की गहन समीक्षा की गई।

बैठक में पॉक्सो एक्ट, आबकारी अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, महिला उत्पीड़न और एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर एवं जघन्य अपराधों से संबंधित मामलों की स्थिति बिंदुवार परखी गई। जिलाधिकारी ने विचाराधीन मुकदमों की प्रगति, दोषसिद्धि की स्थिति और अभियोजन की प्रभावशीलता की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली।

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डीएम कविता मीना ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गंभीर अपराधों के मामलों में पैरवी किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत साक्ष्यों और प्रभावी पैरवी के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराध करने वालों को कानून के तहत उनके कृत्य की सजा मिल सके।

उन्होंने मुकदमों की सुनवाई में गवाहों की समय से न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया। साथ ही पुलिस विभाग और अभियोजन अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी मामले में दस्तावेज, साक्ष्य अथवा पैरवी से संबंधित कमी के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।

बैठक में ई-प्रॉसिक्यूशन पोर्टल पर मुकदमों के अद्यतन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मामलों की जानकारी पोर्टल पर समय से अपडेट करने तथा लंबित प्रकरणों की लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए।
पॉक्सो और महिला अपराधों से जुड़े मामलों को लेकर डीएम ने विशेष संवेदनशीलता और तत्परता बरतने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में सभी संबंधित विभाग पूरी गंभीरता से काम करें। बैठक का स्पष्ट संदेश रहा कि गंभीर अपराधों में कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि मजबूत अभियोजन और प्रभावी पैरवी के जरिए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने तक पूरी प्रक्रिया को मजबूती से आगे बढ़ाया जाए।

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