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जल जीवन मिशन को हापुड़ में मिली रफ्तार, 43 पेयजल योजनाओं पर जल अर्पण पूरा; मार्च 2027 तक शेष योजनाएं होंगी पूर्ण

हापुड़। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध, सुरक्षित और नियमित पेयजल पहुंचाने की दिशा में जल जीवन मिशन के तहत जनपद हापुड़ में चल रहे अभियान ने महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है। ग्रामीण परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से पाइप्ड वाटर सप्लाई उपलब्ध कराने की कवायद लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में दो अक्टूबर को विकासखंड हापुड़ की ग्राम पंचायत मतनावली और विकासखंड धौलाना की ग्राम पंचायत सिवाया में जल जीवन मिशन के अंतर्गत निर्मित पेयजल योजनाओं पर जल अर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

43 ग्रामों के सापेक्ष 51 राजस्व ग्रामों में योजनाएं पूरी

जल जीवन मिशन के तहत जनपद में अब तक 43 ग्रामों के सापेक्ष 51 राजस्व ग्रामों में पेयजल योजनाओं पर जल अर्पण किया जा चुका है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पाइप्ड वाटर सप्लाई के जरिए पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग की ओर से शेष योजनाओं को भी चरणबद्ध ढंग से पूरा करने की प्रक्रिया जारी है। लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि मार्च 2027 तक शेष पेयजल योजनाओं को पूर्ण कर उनके जल अर्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

घर तक नल पहुंचाने के साथ व्यवस्था को बनाए रखना भी जरूरी

अधिकारियों ने जल अर्पण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने तक सीमित नहीं है। योजनाओं के नियमित संचालन, रख-रखाव और उपलब्ध जलापूर्ति व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता को आवश्यक बताते हुए उनसे जलापूर्ति से जुड़ी परिसंपत्तियों की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील की गई।

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पानी की बर्बादी रोकने और जलापूर्ति संसाधनों की सुरक्षा पर जोर

ग्रामीणों से अपील की गई कि वे पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करें और नलों को अनावश्यक रूप से खुला न छोड़ें। पाइपलाइन, पानी की टंकी, पंप तथा जलापूर्ति से संबंधित अन्य परिसंपत्तियों को क्षति न पहुंचाने के लिए भी जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि कहीं भी पाइपलाइन में लीकेज, कम जलापूर्ति अथवा किसी प्रकार की तकनीकी खराबी दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल संबंधित ग्राम पंचायत या विभागीय अधिकारियों को दी जाए, ताकि समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके।

जल गुणवत्ता की जांच और निगरानी की व्यवस्था

ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच और निगरानी की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने पेयजल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया। ग्रामीणों से अपील की गई कि जल को केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यक प्राकृतिक संसाधन मानते हुए इसके संरक्षण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करें।

‘जल साथी ऐप’ से दर्ज होगी पेयजल आपूर्ति की समस्या

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को ‘जल साथी ऐप’ के संबंध में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों को ऐप के माध्यम से दर्ज कराया जा सकता है। लीकेज, कम जलापूर्ति, पाइपलाइन क्षति अथवा अन्य समस्या सामने आने पर उपलब्ध डिजिटल माध्यम से सूचना दर्ज कराई जा सकती है। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे जल साथी ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करते हुए पेयजल योजनाओं की निगरानी और रख-रखाव में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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अधिशासी अभियंता पिन्टू मौर्य समेत अधिकारी रहे मौजूद

जल अर्पण कार्यक्रम में ग्राम प्रधान श्री पंकज, अधिशासी अभियंता श्री पिन्टू मौर्य, सहायक अभियंता श्री अनुज सांगवान, जूनियर इंजीनियर, कार्यदायी फर्म एल.सी. इंफ्रा के प्रतिनिधि तथा मेधज के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर श्री शक्ति तिवारी सहित संबंधित अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल के महत्व, जल संरक्षण तथा पेयजल योजनाओं के सुचारू संचालन में सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया।

मार्च 2027 तक शेष योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य

जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना है। जनपद में पूर्ण हो चुकी योजनाओं के संचालन के साथ शेष योजनाओं को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग ने मार्च 2027 तक शेष पेयजल योजनाओं को पूर्ण कर जल अर्पण कार्यक्रम आयोजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों के मुताबिक योजनाओं की दीर्घकालिक उपयोगिता बनाए रखने के लिए विभागीय प्रयासों के साथ ग्रामीणों की सहभागिता, जल संरक्षण और समय पर शिकायतों की सूचना देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।