राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
कलेक्ट्रेट में पेनड्राइव, जुबां पर आरोप और निशाने पर वोटर लिस्ट—एमएलसी चुनाव से पहले सपा का बड़ा प्रदर्शन
हापुड़। मेरठ खंड स्नातक विधान परिषद चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची को लेकर हापुड़ की सियासत में अचानक उबाल आ गया। कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़े पैमाने पर मतदाता पंजीकरण कराने का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंच गए और धरना देकर प्रशासन के सामने सवालों की लंबी फेहरिस्त रख दी। प्रदर्शन के दौरान सपा जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर ने जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और कथित अनियमितताओं से संबंधित वीडियो पेनड्राइव में उपलब्ध कराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।
मतदाता सूची पर सवाल, कलेक्ट्रेट में गूंजे गंभीर आरोपसपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मेरठ खंड स्नातक एमएलसी चुनाव की मतदाता सूची में नियमों को दर किनार कर अपात्र लोगों के नाम शामिल कराने का प्रयास किया गया। पार्टी का दावा है कि कुछ स्थानों पर फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर आवेदन कराए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है, इसलिए प्रत्येक संदिग्ध आवेदन और उसके दस्तावेज की जांच आवश्यक है।
5,886 मतदाता, 23 मतदान स्थल—इसी सूची पर उठे सवाल जिला प्रशासन की चुनावी तैयारियों के अनुसार हापुड़ में मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के 5,886 मतदाता हैं। इनके लिए आठ मतदान केंद्र और 23 मतदान स्थल निर्धारित किए गए हैं। जिले में मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गए हैं क्योंकि सीमित मतदाता संख्या वाले इस निर्वाचन में प्रत्येक पात्र मतदाता की पहचान और पात्रता चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एक लाख वोट बनवाने का दावा, भाजपा नेता पर लगाए आरोप धरने के दौरान सपा नेताओं ने भाजपा के दिनेश गोयल को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। सपा की ओर से दावा किया गया कि उनके पक्ष में करीब एक लाख वोट बनवाने का प्रयास किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस दावे से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की।हालांकि, एक लाख मतदाताओं से संबंधित यह आंकड़ा सपा का दावा है, निर्वाचन प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसलिए इस दावे की वास्तविकता जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।निजी कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों के इस्तेमाल का आरोप सपा नेताओं ने एक निजी कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से कथित रूप से मतदाता पंजीकरण कराने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि यदि सरकारी कर्मचारी निर्धारित सरकारी प्रक्रिया से बाहर जाकर किसी निजी स्थान पर मतदाता पंजीकरण संबंधी कार्य में लगाए गए हैं तो इसकी जांच की जानी चाहिए।
पार्टी की ओर से कथित गतिविधि का वीडियो भी उपलब्ध कराने की बात कही गई। इसी वीडियो को पेनड्राइव में निर्वाचन अधिकारी को सौंपते हुए उसकी सत्यता, स्थान, समय और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की जांच कराने की मांग की गई।विपिन गुप्ता और विशाल अग्रवाल के नाम भी उठे प्रदर्शन के दौरान विपिन गुप्ता और विशाल अग्रवाल के नाम भी सामने आए।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि दोनों की ओर से बड़ी संख्या में मतदाता आवेदन दाखिल कराए गए। पार्टी ने मांग की कि ऐसे सभी आवेदनों की बारीकी से जांच हो और यह देखा जाए कि आवेदक निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं या नहीं।सपा नेताओं का कहना था कि प्रत्येक आवेदन के साथ लगाए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र, निवास संबंधी विवरण और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
यदि जांच में किसी आवेदन में फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए।पेनड्राइव में वीडियो, अब जांच से खुलेगा कथित खेल का सचधरने का सबसे अहम हिस्सा वह रहा, जब सपा नेताओं ने कथित वीडियो को पेनड्राइव के रूप में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि वीडियो में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य दिखाई देते हैं।अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
वीडियो की तकनीकी जांच के साथ आवेदन पत्रों, दस्तावेजों और मतदाता सूची का मिलान किए जाने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।सपा ने कहा—आरोप सही मिले तो दर्ज हो एफआईआर सपा जिलाध्यक्ष आनंद गुर्जर ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि मतदाता सूची में संदिग्ध नामों की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पार्टी नेताओं ने यह भी मांग रखी कि जांच केवल कुछ चुनिंदा आवेदनों तक सीमित न रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर संदिग्ध तरीके से दाखिल किए गए आवेदनों की समीक्षा की जाए।डुप्लीकेट वोटरों का मुद्दा भी पहले उठा चुकी है सपा एमएलसी मतदाता सूची को लेकर सपा इससे पहले भी सवाल उठा चुकी है। 30 सितंबर को पार्टी की ओर से डुप्लीकेट मतदाताओं के मुद्दे को लेकर निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
वहीं जिला निर्वाचन कार्यालय की वेबसाइट पर मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मतदाता सूचियां उपलब्ध हैं। इनमें पिलखुवा, धौलाना, हापुड़ ब्लॉक, हापुड़ तहसील, सिंभावली और गढ़ क्षेत्र से संबंधित सूचियां शामिल हैं।अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर उठे आरोपों ने हापुड़ में चुनावी माहौल को गरमा दिया है। एक तरफ सपा ने धरना देकर आरोपों के समर्थन में वीडियो और ज्ञापन प्रशासन को सौंपा है, तो दूसरी तरफ इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल पूरा मामला सपा के आरोपों और प्रशासन के समक्ष रखे गए दस्तावेजों तक सीमित है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सौंपे गए वीडियो, पेनड्राइव और मतदाता पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
