राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
अब बीमारी का इंतजार नहीं, बीमारी की वजह पर होगा वार; डीएम कविता मीना ने अफसरों को दिया मिशन मोड का मंत्र
फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और घर-घर दस्तक से होगी निगरानी, जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष फोकस, लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
हापुड़। डेंगू-मलेरिया के मरीज सामने आने का इंतजार करने के बजाय अब बीमारी को जन्म देने वाले कारणों पर ही प्रहार किया जाएगा। मच्छरों के बढ़ते खतरे और संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक अभियान की कमान संभाल ली है।
मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने स्वास्थ्य विभाग समेत नगर पालिका, पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास और अन्य संबंधित विभागों को मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बीमारी फैलाने वाले कारणों पर होगा सीधा प्रहार जिलाधिकारी ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और नालियों की सफाई का काम केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। संबंधित विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी रखें और संवेदनशील स्थानों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।घर-घर पहुंचेगी दस्तक टीम, बुखार के मरीजों पर रहेगी नजर दस्तक अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए।
बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान कर उनकी जानकारी दर्ज की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर समय से जांच और उपचार कराया जा सके। साथ ही लोगों को डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया समेत अन्य संचारी रोगों के लक्षण और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।फॉगिंग और एंटी लार्वा अभियान को मिलेगी रफ्तार प्रशासन की रणनीति में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक है, वहां फॉगिंग और एंटी लार्वा गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। अभियान की निगरानी भी की जाएगी, जिससे कार्रवाई का असर धरातल पर दिखाई दे।अस्पतालों में पहले से तैयार रहें बेड और दवाएं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने पर्याप्त बेड, आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही कहा कि किसी भी मरीज को उपचार के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और स्वास्थ्य विभाग संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयार रहे।जलभराव पर तत्काल कार्रवाई, स्थायी समाधान पर भी जोर बैठक में जलभराव को मच्छरों के प्रजनन और संचारी रोगों के प्रसार की दृष्टि से गंभीर कारण माना गया। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बार-बार जलभराव वाले क्षेत्रों में केवल अस्थायी समाधान न किया जाए, बल्कि समस्या के स्थायी निस्तारण के लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाए।स्कूलों में बच्चों को भी बनाया जाएगा जागरूक शिक्षा विभाग को स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए। विद्यार्थियों को स्वच्छता, साफ पानी के इस्तेमाल, मच्छरों से बचाव और संचारी रोगों के शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी जाएगी।
इसके जरिए बच्चों को अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सावधानी के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।डीएम की दो टूक—लापरवाही हुई तो तय होगी जिम्मेदारी बैठक के दौरान जिलाधिकारी कविता मीना ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ अभियान को जमीन पर प्रभावी बनाएं। उन्होंने कहा कि जनपदवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है।
अभियान में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आने पर उसकी जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।इलाज से पहले रोकथाम पर प्रशासन का फोकस जनपद में संचारी रोगों के खिलाफ प्रशासन की पूरी रणनीति अब बीमारी सामने आने के बाद उपचार तक सीमित नहीं रहेगी।
मच्छरों के प्रजनन स्थल, जलभराव, सफाई व्यवस्था और जागरूकता जैसे उन कारणों पर एक साथ काम किया जाएगा, जिनसे बीमारी के फैलने की आशंका बढ़ती है। प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है—बीमारी का इंतजार नहीं, बल्कि बीमारी की वजह पर पहले ही वार।
