राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
ढोल की थाप, रंग-बिरंगी पोशाक और थिरकते कदम… बड़ौदा हिंदुवान जीआईसी में दिखा भारत का रंग
हापुड़। पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के गांव बड़ौदा हिंदुवान स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय लोक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ढोल की थाप, लोक संगीत की मधुर धुन और रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्र-छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने विद्यालय परिसर को भारतीय लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। विद्यार्थियों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया और ‘विविधता में एकता’ का संदेश दिया।
प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं ने अलग-अलग राज्यों की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया। पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत के साथ विद्यार्थियों का शानदार तालमेल देखने को मिला। एक के बाद एक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और विद्यार्थियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। शानदार प्रदर्शन पर पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से जोड़ना रहा। प्रतियोगिता के माध्यम से छात्र-छात्राओं को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के दौर में अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों को सहेजकर रखना बेहद जरूरी है।
प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और टीम भावना का परिचय दिया। शानदार प्रस्तुतियों के आधार पर खुशी एवं उनके ग्रुप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रथम स्थान हासिल करने पर विजेता ग्रुप के सदस्यों का शिक्षकों और साथी विद्यार्थियों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा। शिक्षकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच देने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय लोक नृत्य प्रतियोगिता विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ शानदार प्रस्तुतियां दीं। ऐसे आयोजनों से बच्चों की रचनात्मक क्षमता निखरती है और उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलना उनके सर्वांगीण विकास के लिए बेहद जरूरी है। प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को उन्होंने शुभकामनाएं दीं।
