हापुड़ / पिलखुवा जीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, जीएस यूनिवर्सिटी में संस्कृत क्लब के तत्वावधान में महर्षि चरक जयंती समारोह का भव्य एवं गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महर्षि चरक के आयुर्वेद के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय चिकित्सा पद्धति की समृद्ध एवं गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया गया। समारोह में संस्कृत, आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली तथा रोगों की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा की गई।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या एवं संस्कृत क्लब की अध्यक्ष डॉ. भावना सिंह तथा उप प्राचार्या डॉ. जीना पटनायक की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलन एवं चरक वंदना के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम स्थल पर भारतीय चिकित्सा परंपरा और संस्कृत संस्कृति की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. भावना सिंह ने महर्षि चरक के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चरक जयंती आयुर्वेद की महान परंपरा को समझने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने, शरीर एवं मन के संतुलन और रोगों की रोकथाम पर भी विशेष जोर देता है। उन्होंने कहा कि भावी चिकित्सकों के लिए अपनी प्राचीन चिकित्सा विरासत और उसके मूल सिद्धांतों को समझना बेहद आवश्यक है।उन्होंने कहा कि संस्कृत आयुर्वेद के मूल ग्रंथों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आयुर्वेद के मूल स्रोतों और महर्षि चरक जैसे महान आचार्यों के योगदान से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं गौरवशाली परंपरा को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के साथ आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।समारोह के दौरान विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने के उद्देश्य से श्लोक वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने संस्कृत के श्लोकों का प्रभावशाली वाचन कर अपनी भाषा, उच्चारण एवं प्रस्तुति क्षमता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में बैच 2022-23 की वंशिका शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बैच 2025-26 की अल्फरीन ने द्वितीय तथा अनुष्का ने तृतीय स्थान हासिल किया।इसके साथ ही विद्यार्थियों के बीच भित्ति पत्र प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आयुर्वेद, संस्कृत एवं भारतीय चिकित्सा परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। बैच 2025-26 की काजल एवं खुशी ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। अंशिका एवं सिमरन ने द्वितीय तथा रोहिनी ने तृतीय स्थान हासिल किया।प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन की जिम्मेदारी डॉ. पंकज तनेजा एवं डॉ. घनश्याम वत्स ने निर्णायक के रूप में निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का बारीकी से मूल्यांकन करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत क्लब के सचिव श्री राम प्रताप यादव के निर्देशन में दीप्ति एवं कोमल ने किया। संचालन के दौरान कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया तथा विद्यार्थियों को चरक जयंती के महत्व और महर्षि चरक के योगदान के बारे में जानकारी दी गई।समारोह में डॉ. ऊषा सिंह, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. राहुल, डॉ. मोहित सहित महाविद्यालय के अन्य संकाय सदस्य एवं समस्त छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। संस्कृत श्लोकों के वाचन से लेकर भित्ति पत्रों की रचनात्मक प्रस्तुति तक प्रत्येक गतिविधि में भारतीय ज्ञान परंपरा की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ अपनी प्राचीन चिकित्सा विरासत, संस्कृत और आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों को समझना भी भावी चिकित्सकों के लिए महत्वपूर्ण है।चरक जयंती समारोह के माध्यम से जीएस आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल की। आयोजन ने विद्यार्थियों में आयुर्वेद के प्रति गौरव, संस्कृत के प्रति रुचि और भारतीय चिकित्सा परंपरा को आगे बढ़ाने की भावना को और मजबूत किया।
