राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma
हापुड। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में हापुड़ टॉप-40 शहरों में भी जगह नहीं बना सका। कभी स्वच्छ हवा के मामले में देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों में शामिल रहा हापुड़ अब बढ़ते प्रदूषण की चपेट में है। सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों से निकलता धुआं, निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियां शहर की हवा को लगातार प्रभावित कर रही हैं। प्रदूषित हवा के कारण जिलेवासियों को सांस संबंधी परेशानियों के साथ फेफड़ों और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
हापुड़ का पहले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन करना मौजूदा स्थिति को और गंभीर बनाता है। सवाल यह है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाला शहर अब टॉप-40 से बाहर कैसे हो गया। प्रदूषण नियंत्रण के लिए अभियान और दावों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
धूल और धुआं बढ़ा रहे प्रदूषणशहर के कई प्रमुख मार्गों पर सड़क किनारे जमा धूल वाहनों के गुजरने के साथ हवा में फैल रही है। निर्माणाधीन क्षेत्रों से उठने वाली धूल भी वातावरण को प्रदूषित कर रही है। कई स्थानों पर नियमित सफाई और पानी के छिड़काव की व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आती।
वहीं, वाहनों की बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन भी शहर की हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।स्वास्थ्य पर बढ़ रहा खतरा प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेने से सांस संबंधी परेशानी, फेफड़ों की समस्या, आंखों में जलन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है।
प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग शहरवासियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल जागरूकता अभियान और कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और वाहनों व औद्योगिक इकाइयों की नियमित निगरानी जरूरी है।
लोगों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से ठोस कार्ययोजना बनाकर प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर तत्काल कार्रवाई करें, ताकि हापुड़ की हवा में सुधार हो और शहर दोबारा स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर स्थान हासिल कर सके।
