राष्ट्र संवाद टाइम्स : Ajay Verma :

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जीन से लेकर कोशिकाओं तक: सरस्वती कॉलेज में फार्मेसी के छात्रों के लिए विशेषज्ञों ने चिकित्सा अनुसंधान के भविष्य को समझाया

पिलखुवा, हापुड़। सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी, हापुड़ में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और फार्मास्युटिकल अनुसंधान से विद्यार्थियों को रूबरू कराने के उद्देश्य से लोकप्रिय व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जीन थेरेपी, क्रिस्पर तकनीक, कोशिका आधारित उपचार और फार्मास्युटिकल जैव प्रौद्योगिकी जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों पर शोधपरक जानकारी साझा की।

भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रायोजन में डीबीटी-सीटीईपी पहल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में फार्मेसी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान की नई तकनीकों को समझने का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने बताया कि जीन और कोशिका आधारित अनुसंधान चिकित्सा विज्ञान में नई संभावनाओं को तलाशने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्वलन श्री एन. वर्धराजन, जनरल मैनेजर, प्रो. (डॉ.) नितिन कुमार, प्राचार्य, सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी तथा आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं डॉ. निधि, प्रमुख, ट्रांसलेशनल एंड क्लिनिकल रिसर्च विभाग, स्कूल ऑफ केमिकल एंड लाइफ साइंसेज, जामिया हमदर्द, नई दिल्ली; डॉ. सुभाष चंद्र सोनकर, रिसर्च साइंटिस्ट, मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली तथा डॉ. एस. सुल्ताना, प्रोफेसर, गलगोटियास कॉलेज ऑफ फार्मेसी, नोएडा ने किया।

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जीन थेरेपी और क्रिस्पर पर हुई विस्तृत चर्चा

व्याख्यान के दौरान विशेषज्ञों ने जीन थेरेपी के वैज्ञानिक आधार, संभावित चिकित्सकीय उपयोग और इस क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं, क्रिस्पर तकनीक के माध्यम से जीन एडिटिंग और जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान में विकसित हो रही संभावनाओं से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।

कोशिका आधारित उपचार पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में कोशिकाओं से जुड़े उपचारों पर लगातार शोध हो रहा है। विद्यार्थियों को फार्मास्युटिकल जैव प्रौद्योगिकी और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के बीच बढ़ते संबंधों की जानकारी भी दी गई।

विशेषज्ञों ने साझा किए शोध के अनुभव

विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने शैक्षणिक एवं शोध अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने उच्च शिक्षा, अनुसंधान और उभरती जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में भी मार्गदर्शन दिया।

कार्यक्रम के संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने जीन थेरेपी, क्रिस्पर, कोशिका आधारित उपचार तथा फार्मास्युटिकल अनुसंधान से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब देते हुए विषय से जुड़ी व्यावहारिक और शोधपरक जानकारी दी।

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सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन एवं वाइस चेयरपर्सन डॉ. राम्या रामचंद्रन ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में हो रहे नवीनतम विकास से निरंतर जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्य प्रो. (डॉ.) नितिन कुमार ने विशेषज्ञ वक्ताओं एवं अतिथियों का पुष्पगुच्छ और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए विद्यार्थियों के लिए ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का संचालन मनीष सम्याल, एसोसिएट प्रोफेसर, फार्मेसी विभाग एवं नेहा वर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह, डॉ. सुप्रियो मैती, डॉ. रश्मि शर्मा, दीपेश, मनीष, खुर्शीद, विशाल, अजय, योगेश, मोहित, संजय, अनुज एवं शादाब सहित समस्त संकाय सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।