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हापुड़ कलेक्ट्रेट में किसानों की हुंकार, गन्ने का भाव ₹600 और दाखिल-खारिज 35 दिन में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन

भाकियू अराजनैतिक ने विभिन्न मांगों को लेकर किया जोरदार धरना-प्रदर्शन, समाधान नहीं होने पर किसान क्रांति की चेतावनी

हापुड़। किसानों की लंबित समस्याओं और विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने बुधवार को हापुड़ कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल निर्धारित करने, गन्ने का भुगतान समय से कराने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया 35 दिन के भीतर पूरी कराने समेत कई मांगों को लेकर किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी आवाज बुलंद की।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।गन्ने का भाव ₹600 करने की मांग पर किसानों का जोरधरने के दौरान गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

किसान नेताओं ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई, डीजल, मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों में वृद्धि के चलते किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य निर्धारित किया जाना आवश्यक है। किसानों ने सरकार से मांग की कि उनकी आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल किया जाए।समय पर गन्ना भुगतान कराने की मांग किसानों ने गन्ने का भुगतान समय से कराने की मांग भी जोरदार तरीके से रखी।

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उनका कहना था कि भुगतान में देरी होने से खेती की अगली तैयारियों और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी होती है। किसान नेताओं ने संबंधित अधिकारियों से भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने और किसानों को समय पर उनकी उपज का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की।दाखिल-खारिज 35 दिन में कराने की मांगभाकियू अराजनैतिक ने राजस्व विभाग से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी प्रशासन को घेरा।

किसानों ने मांग रखी कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया 35 दिन के भीतर पूरी कराई जाए। उनका कहना था कि भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण में देरी होने के कारण किसानों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होने से किसानों को राहत मिलेगी और अनावश्यक भागदौड़ से बचाया जा सकेगा।खतौनी में अंश संबंधी त्रुटियों का समयबद्ध सुधार धरने के दौरान खतौनी में अंश संबंधी त्रुटियों के सुधार की मांग भी उठाई गई।

किसानों ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में गलतियों के कारण भूमि संबंधी कार्यों में कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं। ऐसी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण कराया जाना चाहिए, ताकि किसानों को लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। किसान नेताओं ने प्रशासन से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की।वाहनों से कथित अवैध वसूली बंद कराने की मांगप्रदर्शन में वाहनों से कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी उठाया गया।

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किसान नेताओं ने प्रशासन से शिकायतों का संज्ञान लेकर आवश्यक जांच और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों और आम लोगों से जुड़ी समस्याओं पर प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए, जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।मांगें पूरी नहीं हुईं तो गांव-गांव तक पहुंचेगा आंदोलनकिसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का निर्धारित समय में समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। मांगों की अनदेखी जारी रहने पर संगठन की ओर से आंदोलन को और व्यापक बनाने की बात कही गई।किसान क्रांति की चेतावनी, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांगधरने के दौरान भाकियू अराजनैतिक के नेताओं ने प्रशासन को किसान क्रांति की चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों की मांगों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और सरकार से राहत की अपेक्षा जताई। कलेक्ट्रेट परिसर में हुए प्रदर्शन के माध्यम से संगठन ने गन्ने के उचित मूल्य, समय पर भुगतान और राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। अब किसानों की मांगों पर प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।