राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma
पिलखुवा। जनपद हापुड़ के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र के गांव आजमपुर देहपा में पेड़ों और पर्यावरण से मुहब्बत का जुनून अब एक खूबसूरत मुहिम का रूप ले चुका है। लंबे समय से उपेक्षा और अव्यवस्थाओं का सामना कर रहे गांव के कब्रिस्तान को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने के लिए युवाओं ने ‘बगिया’ नाम से अभियान शुरू किया था। कई महीनों से लगातार चल रही युवाओं की यह मिनी मुहिम अब धरातल पर साफ नजर आने लगी है। श्रमदान से परिसर की तस्वीर बदलने के बाद अब ग्रामीण भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं, जिससे इसे नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
अभियान की शुरुआत 10 अप्रैल 2025 को पर्यावरण प्रेमी जावेद अली ने अपने दोस्तों जुनेद, जहांगीर, कासिम, जाकिर, मनव्वर, शाकिब, वसीम, शेरू, आबिद अली, डॉक्टर काशिफ खुर्शीद समेत अन्य साथियों के साथ की थी। युवाओं का उद्देश्य कब्रिस्तान की बदहाल तस्वीर को बदलकर वहां पेड़-पौधे लगाना और एक खूबसूरत बगिया तैयार करना था, जहां हरियाली के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।मुहिम के रास्ते में युवाओं को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं खींचे।
संसाधनों के अभाव के बावजूद युवाओं ने खुद सफाई और पौधारोपण का जिम्मा उठाया। कई बार पूरी-पूरी रात श्रमदान किया और अपनी मेहनत से परिसर को संवारने का काम जारी रखा। महीनों तक यह अभियान बिना किसी बड़े प्रचार के लगातार चलता रहा और अब इसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।युवाओं की कोशिश है कि गांव का बच्चा-बच्चा पर्यावरण की अहमियत समझे और पेड़-पौधों के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी माने। इसी सोच के साथ ‘आजमपुर की बगिया’ अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
10 सितंबर 2026 को अभियान को नई ताकत तब मिली, जब गांव के लोगों ने युवाओं के साथ खड़े होकर आपसी सहयोग से काम को और तेज करने का फैसला किया। जिला पंचायत सदस्य राशिद अली, मंज़र दरोगा, अनीस प्रधान, डॉक्टर मारूफ, परवेज अब्बास, आरिफ, आस मुहम्मद, शाने आलम, शब्बीर, इस्माईल और रऊफ समेत कई लोगों ने अभियान में बड़ा सहयोग करने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों के जुड़ने से अब इस स्थान को हरियाली और खूबसूरती से संवारने की उम्मीद और मजबूत हो गई है। गांव में युवाओं की इस सकारात्मक पहल को लेकर खुशी का माहौल है। फिलहाल ‘आजमपुर की बगिया’ का काम प्रगति पर है और युवाओं की महीनों पुरानी यह मिनी मुहिम अब ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से बड़े अभियान का रूप लेती नजर आ रही है।
यह पहल सिर्फ एक स्थान को संवारने तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
