राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma
हापुड़ जनपद में टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान, बाबूगढ़ में अधिकारियों-कर्मचारियों की हुई जांचहापुड़। जनपद हापुड़ में सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी की रोकथाम, समय से पहचान और उपचार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार को बाबूगढ़ छावनी स्थित अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया।
शिविर में केंद्र पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की टीबी संबंधी जांच की गई। इसके साथ ही सभी का एक्स-रे कराया गया और सीवाई-टीबी वैक्सीन भी लगाई गई।शिविर का आयोजन जॉइंट डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार के दिशा-निर्देशन एवं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह की अध्यक्षता में किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर के दौरान कर्मचारियों की जांच करने के साथ उन्हें टीबी बीमारी के लक्षण, संक्रमण से बचाव, समय पर जांच और उपचार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि टीबी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर इसकी पहचान होने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
ऐसे में बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच कराना बेहद जरूरी है।शिविर के दौरान जिला पीपीएम कोऑर्डिनेटर सुशील चौधरी ने कर्मचारियों को टीबी के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से खांसी रहती है या बार-बार बुखार आता है, रात में पसीना आता है, वजन तेजी से कम हो रहा है अथवा भूख कम लग रही है तो इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर जांच करानी चाहिए।उन्होंने कहा कि टीबी की समय पर पहचान होने से न केवल मरीज का समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है, बल्कि संक्रमण को दूसरे लोगों तक फैलने से भी रोका जा सकता है।
उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे अपने परिवार और आसपास रहने वाले लोगों को भी टीबी के लक्षणों एवं बचाव के प्रति जागरूक करें।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जांच और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में आमजन की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक लोगों की समय पर जांच होने और संक्रमित व्यक्तियों को जल्द उपचार मिलने से टीबी के संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण को हल्के में न लें और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें। साथ ही उन्होंने कार्यस्थल पर स्वच्छता बनाए रखने और टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने का भी आह्वान किया।शिविर में केंद्र के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जांच के साथ एक्स-रे कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कर्मचारियों को बीमारी से संबंधित आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी।
शिविर का उद्देश्य कार्यस्थल पर टीबी की जल्द पहचान, रोकथाम, उपचार और जागरूकता को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. दीक्षा, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक दीपक कुमार और एक्स-रे टेक्नीशियन अजहर मौजूद रहे। वहीं अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र की ओर से जॉइंट डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ. साक्षी वशिष्ठ समेत अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि टीबी के खिलाफ अभियान को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि बीमारी की समय पर पहचान कर संक्रमित मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जा सके और जनपद को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
