राष्ट्र संवाद टाइम्स हापुड़ :
हापुड़ में पशुवधशाला पर गो सेवा आयोग की औचक छापेमारी, सीसीटीवी से लेकर दस्तावेजों तक खंगाला पूरा रिकॉर्ड
हापुड़। पशुओं के स्वास्थ्य, परिवहन और कटान से जुड़े नियमों के पालन को लेकर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने सोमवार को हापुड़ में बड़ी कार्रवाई करते हुए रामपुर रोड स्थित मैसर्स रेवेन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की पशुवधशाला का औचक निरीक्षण किया। गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल और सदस्य दीपक गोयल ने मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओपी मिश्रा तथा निदेशालय द्वारा नामित पशुचिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह के साथ पशुवधशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। अचानक पहुंचे आयोग के अधिकारियों ने पशुवधशाला के रिकॉर्ड से लेकर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तक खंगाली, जिससे प्रबंधन में भी हलचल मच गई।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पशुवधशाला में मौजूद अभिलेखों की गहन जांच की। एंटीमार्टम, पोस्टमार्टम और कार्टून लेवी से संबंधित रिकॉर्ड के साथ-साथ पशुओं के परिवहन प्रमाण-पत्र, महिषवंशीय पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को भी बारीकी से देखा गया। अधिकारियों ने केवल कागजी रिकॉर्ड की जांच तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि लैरेज में रखे गए पशुओं की भी मौके पर विस्तृत जांच-पड़ताल की।
एक सप्ताह की सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई निगरानी
गो सेवा आयोग की टीम ने पशुवधशाला में लगे सीसीटीवी कैमरों की पिछले एक सप्ताह की फुटेज भी खंगाली। फुटेज के जरिए पशुओं के आने, उन्हें रखने, परिवहन और अन्य गतिविधियों की स्थिति को देखा गया। आयोग की इस जांच का उद्देश्य नियमों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना रहा। अधिकारियों ने पशुवधशाला प्रबंधन से संबंधित रिकॉर्ड को भी मौके पर मिलान कर देखा।
जांच के दौरान जुलाई माह में जमा की गई विभिन्न लेवी की धनराशि का रिकॉर्ड भी सामने आया। पशुवधशाला द्वारा एंटीमार्टम शुल्क के रूप में 15 रुपये प्रति बड़े पशु की दर से 4,035 रुपये, पोस्टमार्टम शुल्क 30 रुपये प्रति बड़े पशु की दर से 7,350 रुपये तथा कार्टून लेवी शुल्क 1.25 रुपये प्रति कार्टून की दर से 2,10,131.25 रुपये की धनराशि चालान के माध्यम से बैंक में जमा की गई है।
एपीडा से मान्यता, रोजाना एक हजार पशुओं के कटान की अनुमति
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि संबंधित पशुवधशाला भारत सरकार की संस्था एपीडा से मान्यता प्राप्त है। एपीडा द्वारा पशुवधशाला को प्रतिदिन 1,000 महिषवंशीय पशुओं के कटान की अनुमति प्राप्त है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अनुमति की तुलना में यहां वास्तविक कटान की संख्या कम है।
निरीक्षण के दौरान आयोग के अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि पशुवधशाला में पशुओं से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। पशुओं को रखने की व्यवस्था से लेकर उनके स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों तक की पड़ताल की गई।
बीमार और गर्भित पशुओं के कटान पर आयोग सख्त
निरीक्षण के दौरान गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल ने पशुवधशाला प्रबंधन को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए कि बीमार तथा गर्भित महिषवंशीय पशुओं का कटान किसी भी स्थिति में न किया जाए। उन्होंने पशुओं के परिवहन में पशु क्रूरता निवारण से संबंधित नियमों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
आयोग ने स्पष्ट किया कि पशुओं के परिवहन से लेकर पशुवधशाला में रखे जाने और कटान तक प्रत्येक स्तर पर निर्धारित नियमों का पालन होना जरूरी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
तीन माह का रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज आयोग को देना होगा
औचक निरीक्षण के बाद आयोग ने पशुवधशाला प्रबंधन पर निगरानी और बढ़ाते हुए पिछले तीन माह के एंटीमार्टम, पोस्टमार्टम और कार्टून लेवी का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह की सीसीटीवी फुटेज भी पेनड्राइव में उपलब्ध कराने को कहा गया है।
निर्देश के मुताबिक यह पूरा रिकॉर्ड मुख्य पशुचिकित्साधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पशुवधशाला में निर्धारित नियमों के पालन और रिकॉर्ड में दर्ज गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की जा सकेगी।
गो सेवा आयोग के औचक निरीक्षण ने साफ कर दिया कि पशुओं के स्वास्थ्य, परिवहन और कटान से जुड़े नियमों की निगरानी अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। रिकॉर्ड के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद पशुओं की स्थिति की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बाद पशुवधशाला प्रबंधन को नियमों के अनुपालन को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
— डॉ. ओपी मिश्रा, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, हापुड़
