राष्ट्र संवाद टाइम्स हापुड़/गाज़ियाबाद

📢 Join Our WhatsApp Group

ताज़ा खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

Join Now

नमो भारत की उम्मीद खत्म नहीं, लेकिन हापुड़ कनेक्टिविटी की प्रक्रिया अब शून्य से होगी शुरू

RTI में NCRTC का बड़ा खुलासा—गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर का अभी तक नहीं हुआ व्यवहार्यता सर्वे, न DPR; संभावित रूट और स्टेशनों पर भी तस्वीर साफ नहीं

हापुड़। जनपद हापुड़ को नमो भारत से जोड़ने की उम्मीदों को फिलहाल बड़ा झटका जरूर लगा है, लेकिन इसे उम्मीदों का अंत नहीं माना जा सकता। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि गाजियाबाद-हापुड़ नमो भारत कॉरिडोर के लिए अभी तक व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार नहीं हुई है। ऐसे में रूट, स्टेशन और निर्माण की समयसीमा को लेकर चल रही चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं है। NCRTC की आधिकारिक परियोजना सूची में गाजियाबाद-हापुड़ को भविष्य के चरण में शामिल किया गया है, लेकिन मौजूदा RTI जवाब से स्पष्ट है कि परियोजना की जमीनी तैयारी अभी शुरुआती स्तर पर भी नहीं पहुंची है।

नगर के मोहल्ला श्रीनगर निवासी सुमित अग्रवाल ने इसी मुद्दे को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत NCRTC से चार अहम सवाल पूछे थे। उनका मकसद यह जानना था कि हापुड़ को नमो भारत अथवा रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ने को लेकर वास्तव में सरकारी स्तर पर क्या प्रक्रिया चल रही है और सोशल मीडिया व विभिन्न माध्यमों में सामने आ रहे दावों की वास्तविकता क्या है।

RTI में पूछे गए चार अहम सवाल

Also Read  रक्षाबंधन पर सुरक्षा की कमान संभालने सड़कों पर उतरे हापुड़ एसपी, बस स्टैंड पर बढ़ती भीड़ के बीच खुद परखी व्यवस्था, यात्रियों के लिए अतिरिक्त बसों का कराया इंतजाम

सुमित अग्रवाल ने पूछा कि मेरठ-हापुड़ अथवा गाजियाबाद-हापुड़ के बीच नमो भारत/रैपिड रेल सेवा को लेकर कोई आधिकारिक प्रक्रिया चल रही है या नहीं। यदि योजना है तो उसका संभावित रूट क्या होगा, किन क्षेत्रों से होकर कॉरिडोर गुजरेगा और संभावित स्टेशन कौन-कौन से होंगे। इसके साथ ही उन्होंने परियोजना के निर्माण कार्य की संभावित शुरुआत और उसकी समयसीमा को लेकर भी जानकारी मांगी।

NCRTC के जवाब ने फिलहाल स्थिति को काफी हद तक साफ कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद-हापुड़ मार्ग के लिए अभी तक कोई व्यवहार्यता अध्ययन नहीं कराया गया और न ही DPR तैयार की गई है। इसलिए संभावित स्टेशनों के नाम, अंतिम एलाइनमेंट और निर्माण शुरू होने की तारीख को लेकर सामने आने वाले दावों को अभी आधिकारिक नहीं माना जा सकता।

बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बीच कनेक्टिविटी क्यों जरूरी?

हापुड़ की लगातार बढ़ती आबादी, व्यापारिक गतिविधियों और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार के बीच दिल्ली-एनसीआर से तेज और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली और मेरठ की ओर आवागमन करते हैं।

ऐसे में नमो भारत कनेक्टिविटी सिर्फ यात्रियों की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि हापुड़ के भविष्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के फरवरी 2026 से पूरी तरह परिचालन में आने और करोड़ों यात्रियों द्वारा इसका इस्तेमाल किए जाने के बाद हापुड़ को इस नेटवर्क से जोड़ने की मांग और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

Also Read  हापुड़ के गांवों को मिलेगी बेहतर राह जल्द 15 करोड़ से सड़कें होंगी दुरुस्त 50 से अधिक गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

उम्मीद बाकी, लेकिन अब प्रक्रिया सर्वे से होगी शुरू

RTI के जवाब का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि हापुड़ के लिए नमो भारत की संभावना खत्म नहीं हुई है। NCRTC की अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर गाजियाबाद-हापुड़ को भविष्य के चरणों के प्रस्तावित कॉरिडोर में शामिल किया गया है। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि इसे जमीन पर उतारने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, यात्री मांग का आकलन, रूट निर्धारण, स्टेशन चयन और उसके बाद DPR जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

इसलिए फिलहाल हापुड़ के सामने सवाल यह नहीं है कि नमो भारत आएगा या नहीं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि व्यवहार्यता सर्वे की शुरुआत कब होगी और हापुड़ को प्राथमिकता सूची में कब आगे लाया जाएगा।

सुमित अग्रवाल का कहना है कि बढ़ती आबादी, औद्योगिक क्षेत्र और प्रतिदिन होने वाले बड़े पैमाने के आवागमन को देखते हुए सरकार और NCRTC को गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर का व्यवहार्यता अध्ययन जल्द शुरू कराना चाहिए। उनका कहना है कि सर्वे और तकनीकी अध्ययन के बाद ही रूट, स्टेशन और परियोजना की समयसीमा को लेकर ठोस तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल RTI ने अफवाहों पर विराम लगा दिया है, लेकिन हापुड़ की नमो भारत की उम्मीद को खत्म नहीं किया—अब असली परीक्षा इस बात की है कि प्रस्तावित कॉरिडोर कागज से निकलकर सर्वे और फिर जमीन तक कब पहुंचता है।