राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma
जनपद हापुड़ के विकास खंड धौलाना के ग्राम सौलाना निवासी तपनदीप पुत्र शीशपाल लंबे समय से जाली गेट बनाने का कार्य कर रहे हैं। उनका परिवार इसी काम से होने वाली आमदनी पर निर्भर था। मेहनत और हुनर होने के बावजूद सीमित संसाधनों के कारण वह अपने काम का विस्तार नहीं कर पा रहे थे। ग्राम डहाना में आयोजित जन चौपाल के दौरान उद्योग विभाग के अधिकारियों से तपनदीप को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना की जानकारी मिली। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जन सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना के अंतर्गत 10 दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान तपनदीप को जाली गेट निर्माण से जुड़े कार्य को बेहतर तरीके से करने, नई जानकारी हासिल करने और अपने हुनर को आगे बढ़ाने के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें उनके कार्य से संबंधित आवश्यक उपकरण एवं सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही उनके खाते में आर्थिक सहायता की धनराशि भी प्राप्त हुई।योजना से मिले उपकरण तपनदीप के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। अब उन्हें अपनी दुकान पर काम करने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी जाली गेट से संबंधित कार्य मिलने लगे हैं। बाहर से काम मिलने पर वह योजना के तहत मिले उपकरणों को साथ लेकर मौके पर पहुंचते हैं और काम पूरा करते हैं। इससे उन्हें दुकान की आमदनी के अलावा अतिरिक्त आय भी प्राप्त होने लगी है।तपनदीप का कहना है कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना ने उनके हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर दिया है। योजना के माध्यम से मिले प्रशिक्षण और उपकरणों से उन्हें अपना काम बढ़ाने में मदद मिली है। अतिरिक्त काम मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।तपनदीप ने इस योजना के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कारीगरों के लिए चलाई जा रही यह योजना उनके जैसे जरूरतमंद लोगों के लिए काफी मददगार है। उन्होंने उद्योग विभाग के अधिकारियों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उन्हें योजना की जानकारी दी और इसका लाभ दिलाने में सहयोग किया।विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। तपनदीप की कहानी इस बात की मिसाल है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और संसाधन मिलने पर हुनर को रोजगार और बेहतर आमदनी का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।
