राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
पैन नंबर से खड़ा कर दिया करोड़ों का कथित GST कारोबार, 73 लाख के नोटिस ने खोला 7.5 करोड़ के लेनदेन का राज
हापुड़। एक पैन नंबर… एक ऐसी फर्म, जिससे पैन धारक का कोई वास्ता होने का दावा नहीं… और फिर सामने आया करोड़ों रुपये का लेनदेन। आयकर विभाग से करीब 73 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस पहुंचा तो शिकायतकर्ता विशाल गौड़ के सामने ऐसा मामला आया, जिसकी उन्हें कथित तौर पर कोई जानकारी ही नहीं थी। शिकायत के मुताबिक, उनके पैन नंबर का दुरुपयोग कर ‘जिल इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्म तैयार की गई और उसके नाम पर करीब 7.5 करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए। मामला सामने आने के बाद अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कथित फर्जीवाड़े की कड़ियां जोड़नी शुरू कर दी हैं।
शिकायतकर्ता विशाल गौड़ का आरोप है कि उन्होंने न तो उक्त फर्म का गठन कराया और न ही उसके नाम से किसी तरह का कारोबार किया। इसके बावजूद उनके पैन नंबर से जुड़ी जानकारी का कथित रूप से इस्तेमाल करते हुए फर्म तैयार की गई और उसके नाम पर कारोबारी गतिविधियां संचालित की गईं। मामला तब सामने आया, जब आयकर विभाग की ओर से पैन नंबर से संबंधित करीब 73 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस उनके पास पहुंचा। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने संबंधित फर्म और अपने पैन नंबर से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई, जिसके बाद कथित लेनदेन का मामला सामने आने की बात कही गई है।
73 लाख का नोटिस पहुंचा तो सामने आया 7.5 करोड़ का कथित खेल
आयकर विभाग के नोटिस ने पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया कि आखिर शिकायतकर्ता के पैन नंबर से इतनी बड़ी वित्तीय गतिविधियां कैसे जुड़ गईं। शिकायत के अनुसार, रिकॉर्ड की पड़ताल के दौरान ‘जिल इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म सामने आई। आरोप है कि इस फर्म के नाम पर करीब 7.5 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि पैन धारक को इसकी जानकारी नहीं थी। अब पुलिस इस बात की जांच करेगी कि फर्म के दस्तावेज किसने तैयार किए और उसके नाम पर कारोबार संचालित करने वाला व्यक्ति कौन था।
नाम एक व्यक्ति का, फर्म किसी और की गतिविधियों के आरोप
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि अज्ञात व्यक्ति ने उनके पैन नंबर का कथित दुरुपयोग कर फर्म बनाई और उसके माध्यम से वित्तीय एवं कारोबारी लेनदेन किए। ऐसे में जांच का दायरा केवल फर्म के गठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीएसटी पंजीकरण, कारोबार से जुड़े दस्तावेज, लेनदेन का रिकॉर्ड और फर्म के संचालन से जुड़े लोगों तक भी पहुंच सकता है।
ADG के आदेश के बाद FIR, अब दस्तावेज खोलेंगे कथित फर्जीवाड़े की परतें
मामले में मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक के आदेश के बाद हापुड़ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक शशांक सिंह को सौंपी गई है। विवेचक अब फर्म के गठन से लेकर उसके नाम पर हुए कथित लेनदेन तक की पूरी जानकारी जुटाएंगे।
GST रिकॉर्ड, पैन और फर्म के दस्तावेज जांच के केंद्र में
जांच के दौरान पुलिस संबंधित विभागों से फर्म के पंजीकरण और जीएसटी संबंधी रिकॉर्ड हासिल कर सकती है। इसके साथ ही पैन नंबर के इस्तेमाल, फर्म के दस्तावेज, कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड और कथित करोड़ों रुपये के लेनदेन की पड़ताल की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि फर्म के नाम से हुए लेनदेन का वास्तविक संचालन किसने किया और उससे जुड़े दस्तावेजों में किन लोगों की भूमिका रही।
अब जांच बताएगी—पैन का इस्तेमाल कैसे हुआ और करोड़ों के लेनदेन के पीछे कौन
मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पूरे मामले की असली तस्वीर विवेचना में सामने आएगी। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के साथ-साथ संबंधित विभागीय और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस के अनुसार, आरोपों की पुष्टि विवेचना के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
