राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
जेब नहीं, सीधे बैंक खाते पर हमला! गूगल पे के रास्ते साइबर ठगों ने उड़ाए 1.96 लाख
हापुड़। सिंभावली थाना क्षेत्र के बक्सर गांव में साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। अज्ञात साइबर ठग ने कथित तौर पर एक युवक के मोबाइल फोन को हैक कर उसके पंजाब नेशनल बैंक खाते से 1.96 लाख रुपये निकाल लिए। ठगों ने गूगल पे (Google Pay) का इस्तेमाल करते हुए दो अलग-अलग यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए रकम अपने कब्जे में कर ली।
खाते से मेहनत की कमाई निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित के होश उड़ गए। पीड़ित ने थाना सिंभावली पुलिस से शिकायत कर अज्ञात आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मोबाइल पर कब्जा, गूगल पे से रकम पर वार प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक का बैंक खाता पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में है।
आरोप है कि साइबर ठगों ने उसके मोबाइल फोन तक पहुंच बनाने के बाद गूगल पे के माध्यम से खाते से दो अलग-अलग लेन-देन किए। इसके बाद 1.96 लाख रुपये की धनराशि खाते से निकाल ली गई। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने पर युवक को साइबर ठगी का पता चला। घटना ने डिजिटल भुगतान के दौरान मोबाइल और बैंकिंग सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मोबाइल हैक किए जाने का वास्तविक तरीका पुलिस की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सिंभावली पुलिस की जांच तेज, ट्रांजेक्शन से खुलेगा ठगी का राज पीड़ित की शिकायत पर सिंभावली पुलिस ने अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक खाते से हुए यूपीआई ट्रांजेक्शन, धनराशि प्राप्त करने वाले खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने युवक के मोबाइल फोन तक किस माध्यम से पहुंच बनाई, लेन-देन किस तरह किया गया और ठगी की रकम किस खाते में ट्रांसफर की गई। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है।पुलिस अधिकारियों की अपील: साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें विशेष सावधानी पुलिस अधिकारियों ने लोगों से साइबर ठगी के मामलों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
पुलिस की ओर से लोगों को जागरूक करते हुए कहा गया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड न करें और अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। बैंक खाते, यूपीआई पिन, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। डिजिटल भुगतान करते समय लेन-देन की पुष्टि जरूर करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी कई बार बैंक अधिकारी, केवाईसी अपडेट, इनाम, नौकरी, बिजली बिल या अन्य बहानों से लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। कई बार ठग संदिग्ध लिंक भेजकर या रिमोट एक्सेस एप्लीकेशन डाउनलोड करवाकर धोखाधड़ी की कोशिश करते हैं। इसलिए लोगों को मोबाइल की सुरक्षा और डिजिटल भुगतान के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यूपीआई पिन पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान को अधिकृत करने के लिए इस्तेमाल होता है।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर यूपीआई पिन डालने, स्क्रीन शेयर करने या मोबाइल की पहुंच देने से बचना चाहिए। एक छोटी सी लापरवाही, खाते से साफ हो सकती है पूरी जमा पूंजीसाइबर ठग लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। कभी बैंक खाता बंद होने का डर दिखाकर, तो कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर भरोसा करना लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें और अपने बैंक खाते की जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति को न दें।
साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता ही ऐसे अपराधों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत पुलिस की ओर से लोगों को सलाह दी जाती है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करें।
पीड़ित तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और आधिकारिक वेबसाइट [cybercrime.gov.in](https://cybercrime.gov.in/) पर भी रिपोर्ट करें। जल्द शिकायत करने से संबंधित लेन-देन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल बक्सर गांव के इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और साइबर ठगों तक पहुंचने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
