राष्ट्र संवाद टाइम्स हापुड़ : ajay verma
हापुड़ में पारंपरिक खेती से बदला किसान का रुख, तोरई की खेती ने बढ़ाया मुनाफा; सरकार द्वारा मिले निशुल्क बीज से मिला दोगुना लाभ
हापुड़। जनपद हापुड़ में पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी फसलों की ओर किसानों का रुख बदल रहा है। गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के किसान उदयवीर सिंह ने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत मिले निशुल्क बीज का लाभ उठाकर तोरई की खेती शुरू की। किसान के मुताबिक, पारंपरिक फसलों की तुलना में तोरई की खेती से करीब दो गुना अधिक लाभ मिला, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ।
गढ़मुक्तेश्वर विकासखंड के गांव रहरवा किरावली निवासी उदयवीर सिंह पुत्र सूखा सिंह 1.20 हेक्टेयर भूमि पर पहले धान, गन्ना, गेहूं, ज्वार, मक्का और ग्वार जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। किसान के अनुसार, इन फसलों से उन्हें अपेक्षाकृत कम उत्पादन और लाभ प्राप्त हो रहा था। इसी दौरान गांव में उद्यान विभाग के कर्मचारियों की ओर से खुली बैठक आयोजित की गई, जिसमें किसानों को एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना की जानकारी दी गई।
बैठक में किसानों को लौकी, करेला, तोरई, भिंडी समेत विभिन्न शाकभाजी फसलों की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उद्यान विभाग के कर्मचारियों के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उदयवीर सिंह ने भी पारंपरिक फसलों के बजाय तोरई की खेती करने का निर्णय लिया।
योजना के तहत उद्यान विभाग की ओर से किसान को एक हेक्टेयर भूमि के लिए तोरई का बीज निशुल्क उपलब्ध कराया गया। किसान ने विभागीय कर्मचारियों के मार्गदर्शन के अनुसार खेत में फसल तैयार की। उदयवीर सिंह का कहना है कि गन्ना, धान, गेहूं और ज्वार की खेती की तुलना में तोरई की फसल से उन्हें लगभग दोगुना अधिक लाभ प्राप्त हुआ।
बागवानी ने बदली आर्थिक तस्वीर
तोरई की खेती से बेहतर लाभ मिलने के बाद किसान की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ। उदयवीर सिंह के अनुसार, अब वह अपने परिवार का जीवन-यापन बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं। उन्होंने उद्यान विभाग का आभार जताते हुए भविष्य में भी बागवानी की आधुनिक तकनीक और नई फसलों की जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
जिला उद्यान विभाग की इस सफलता की कहानी से यह भी सामने आया है कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और शाकभाजी उत्पादन की ओर प्रोत्साहित करने से बेहतर आमदनी के अवसर मिल सकते हैं। विभागीय मार्गदर्शन और सरकारी योजना का लाभ लेकर उदयवीर सिंह ने खेती का तरीका बदला और तोरई की फसल से बेहतर लाभ हासिल किया। उन्होंने अन्य किसानों से भी सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की।
