राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma

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डिग्री नहीं, हुनर बोलता है… मिट्टी में कलाकार ने गढ़ी आस्था, गणेश चतुर्थी पर सजे विघ्नहर्ता के मनमोहक स्वरूप

हापुड़ के बाजारों में गणपति की आकर्षक प्रतिमाओं ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान, मूर्तिकार दिन-रात दे रहे अंतिम रूप हापुड़। इतिहास गवाह है कि कला और सफलता किसी डिग्री की मोहताज नहीं होती। जब कोई कलाकार मिट्टी, पत्थर या कबाड़ में भी अपनी कल्पनाशक्ति और हुनर का रंग भर देता है, तो लोग उसकी डिग्री नहीं, बल्कि उसकी कला की खूबसूरती और उसके पीछे छिपी मेहनत को देखते हैं

कला किसी विश्वविद्यालय की चारदीवारी में ही जन्म नहीं लेती, बल्कि कलाकार के दिल, दिमाग और उसकी उंगलियों के जादू से आकार लेती है। इन दिनों यही हुनर हापुड़ के बाजारों में दिखाई दे रहा है, जहां मिट्टी के जरिए भगवान गणेश के आकर्षक और मनमोहक स्वरूपों को साकार किया जा रहा है।गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में गणेश उत्सव की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। बाजारों में भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाओं से सजी दुकानें श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रही हैं।

प्रतिमाओं को देखने और अपनी पसंद का गणपति चुनने के लिए लोग परिवार के साथ बाजारों का रुख कर रहे हैं। कहीं मूषक पर सवार गणपति का मनमोहक स्वरूप दिखाई दे रहा है तो कहीं आशीर्वाद मुद्रा में विराजमान विघ्नहर्ता श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।शहर के गोल मार्केट, रेलवे रोड, पक्का बाग और कोठी गेट समेत प्रमुख बाजारों में गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाओं तक की लंबी श्रृंखला दिखाई दे रही है।

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मूर्तिकारों ने प्रतिमाओं को आकर्षक रंगों और खूबसूरत डिजाइन से सजाया है। भगवान गणेश की अलग-अलग मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और स्वरूपों वाली प्रतिमाएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।इन प्रतिमाओं को तैयार करने के पीछे मूर्तिकारों की कई दिनों की मेहनत छिपी हुई है। मिट्टी को आकार देने से लेकर भगवान गणेश का स्वरूप तैयार करने और फिर उसे रंगों व सजावट से जीवंत बनाने तक कलाकारों को घंटों मेहनत करनी पड़ती है। किसी प्रतिमा के मुकुट को अंतिम रूप दिया जा रहा है तो कहीं चेहरे की भाव-भंगिमा को और आकर्षक बनाया जा रहा है।

कलाकारों की उंगलियां मिट्टी को इस तरह आकार दे रही हैं कि देखने वाले कुछ पल के लिए प्रतिमा से नजरें नहीं हटा पा रहे हैं।गणपति की प्रतिमाएं खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहे श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। लोग अपने घरों और पूजा स्थलों के लिए अपनी पसंद के अनुसार प्रतिमाओं का चयन कर रहे हैं। वहीं बच्चों में गणपति बप्पा को घर ले जाने को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। रंग-बिरंगे और अलग-अलग स्वरूपों में सजे गणपति बच्चों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं।

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गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। एक ओर श्रद्धालु विघ्नहर्ता के स्वागत की तैयारी में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर मूर्तिकार अपनी कला के माध्यम से आस्था को आकार देने में लगे हैं। मिट्टी के साधारण ढेर को भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमा में बदल देना इस बात का प्रमाण है कि सच्चा हुनर किसी डिग्री या प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं होता।

जैसे-जैसे गणेश चतुर्थी नजदीक आ रही है, हापुड़ के बाजारों में रौनक लगातार बढ़ती जा रही है। मूर्तिकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं और श्रद्धालु अपने प्रिय गणपति को घर लाने की तैयारियों में लगे हैं। जल्द ही घरों और पंडालों में विधि-विधान से गणपति बप्पा विराजेंगे और पूरा वातावरण “गणपति बप्पा मोरया” के जयघोष से गूंज उठेगा।