राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

📢 Join Our WhatsApp Group

ताज़ा खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

Join Now

गोवंश संरक्षण पर प्रशासन का शिकंजा, गो आश्रय स्थलों की व्यवस्था में लापरवाही अब नहीं होगी बर्दाश्त

हापुड़। निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और उनके भरण-पोषण की व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने अब निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी हैं। जिलाधिकारी हापुड़ की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जनपद स्तरीय अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समीक्षा समिति की मासिक बैठक में गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में साफ किया गया कि गोवंशों के लिए चारे, स्वास्थ्य और संरक्षण की व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सालभर हरे चारे की उपलब्धता पर प्रशासन का फोकस
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के प्रत्येक गो आश्रय स्थल पर पूरे वर्ष हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए स्थानीय किसानों से अनुबंध करने की व्यवस्था विकसित करने को कहा गया, ताकि चारे की आपूर्ति के लिए आश्रय स्थलों को किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े। प्रशासन का जोर केवल चारे की उपलब्धता पर ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता और गोवंशों के स्वास्थ्य के अनुरूप होने पर भी रहा।

चारे में यूरिया और कीटनाशक के इस्तेमाल पर सख्त रोक
बैठक में हरे चारे की गुणवत्ता को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों को कहा गया कि जिन किसानों से चारे की व्यवस्था की जाएगी, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि चारा उत्पादन में यूरिया अथवा किसी भी प्रकार की कीटनाशक दवाओं का ऐसा प्रयोग न हो, जिससे गोवंशों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका हो। इस व्यवस्था की निगरानी को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी माना गया है।

Also Read  सड़क पर पुरानी गाड़ी दौड़ाना पड़ेगा भारी, परिवहन विभाग अब करेगा सीधी कार्रवाई

गो आश्रय स्थलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण होगा अनिवार्य
गोवंशों के स्वास्थ्य को लेकर पशु चिकित्सा विभाग को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। पशु चिकित्साधिकारियों को नियमित अंतराल पर गो आश्रय स्थलों का भ्रमण कर वहां संरक्षित गोवंशों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। बीमार, कमजोर अथवा उपचार की आवश्यकता वाले गोवंशों की पहचान कर उन्हें समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

गोचर भूमि पर नैपियर ग्रास से मजबूत होगी चारे की व्यवस्था
चारे की स्थायी उपलब्धता के लिए प्रशासन ने गोचर भूमि के बेहतर उपयोग की दिशा में भी कदम बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गोचर भूमि पर हरे चारे के साथ नैपियर ग्रास की बुवाई कराने को कहा गया है। इससे स्थानीय स्तर पर चारे का उत्पादन बढ़ाने और गो आश्रय स्थलों को वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कई विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में तय हुई जवाबदेही
बैठक में जनपद के सभी अधिशासी अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला पंचायतराज अधिकारी, उप कृषि निदेशक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा गो आश्रय स्थलों के संचालक मौजूद रहे। विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान गोवंश संरक्षण से जुड़े कार्यों की प्रगति और व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई।

Also Read  गन्ना किसानों के ₹203 करोड़ बकाया भुगतान पर बैठक, 15 अक्टूबर तक ₹100 करोड़ भुगतान का लक्ष्य

व्यवस्था में खामी मिली तो जिम्मेदारी तय करने के संकेत
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गो आश्रय स्थलों में गोवंशों के संरक्षण, भरण-पोषण, चारे और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था केवल कागजी स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए। आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करते हुए कमियों को तत्काल दूर कराने पर जोर दिया गया।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. ओ.पी. मिश्रा ने बताया कि गोवंशों के बेहतर संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि गो आश्रय स्थलों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, चारे की उपलब्धता और पशुओं के भरण-पोषण की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।