राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

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फार्मेसियों की मनमानी पर प्रशासन का वार, दवाओं के दाम और स्टॉक का हिसाब जनता के सामने होगा

लखनऊ, हापुड़। देशभर में दवाओं की कीमतों को लेकर मरीजों को अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने प्रदेश की सभी रिटेल फार्मेसियों को अपनी सार्वजनिक वेबसाइट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन वेबसाइटों पर फार्मेसी का लाइसेंस नंबर, नियुक्त फार्मासिस्ट, लाइसेंसी परिसर और स्टॉक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। व्यवस्था के तहत इस जानकारी को नियमित रूप से अपडेट भी करना होगा।

अस्पताल फार्मेसियों में खुलेगा दवाओं की कीमतों का हिसाब

मरीजों के हित में अस्पताल परिसरों में संचालित फार्मेसियों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे अस्पतालों में जहां मरीजों के पास दवाएं अथवा अन्य चिकित्सा उत्पाद खरीदने के लिए व्यावहारिक विकल्प सीमित होते हैं, वहां दवाओं की वास्तविक खरीद दर और बिक्री दर के आधार पर मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी। इसका उद्देश्य मरीजों को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है कि संबंधित दवा किस कीमत पर खरीदी गई और किस दर पर मरीज को उपलब्ध कराई जा रही है।

लाइसेंस से फार्मासिस्ट और स्टॉक तक ऑनलाइन होगी जानकारी

पूर्व में जारी कार्यालय आदेश के क्रम में सभी रिटेल फार्मेसियों को सार्वजनिक वेबसाइट तैयार करनी होगी। वेबसाइट पर लाइसेंस संख्या, नियुक्त फार्मासिस्ट, लाइसेंसी परिसर तथा स्टॉक संबंधी विवरण उपलब्ध कराया जाना है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को साप्ताहिक आधार पर अपडेट करना होगा। इससे फार्मेसी से संबंधित जरूरी जानकारी आम लोगों के लिए भी सुलभ हो सकेगी।

निरीक्षण की फाइलों से निकलकर जनता तक पहुंचेगा रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत फार्मेसी से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को केवल विभागीय निरीक्षण या रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने की तैयारी है। क्षेत्रीय अधिकारियों और औषधि निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित फार्मेसियों में निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इससे फार्मेसी संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

1 नवंबर से व्यवस्था लागू करने की तैयारी

विभागीय निर्देशों के अनुसार पूर्व में जारी आदेशों का क्रियान्वयन 1 नवंबर 2026 से अपेक्षित है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में संचालित फार्मेसियों द्वारा निर्धारित व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को दवाएं खरीदते समय कीमतों से संबंधित अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

मरीजों की कीमत संबंधी उलझन दूर करने की कोशिश

अस्पतालों में संचालित फार्मेसियों को लेकर जारी निर्देश का मुख्य जोर मरीजों के हित और मूल्य पारदर्शिता पर है। जहां मरीजों के पास दवा खरीदने के विकल्प सीमित होते हैं, वहां खरीद और बिक्री दर प्रदर्शित करने से उन्हें दवा की कीमत को समझने में मदद मिलेगी। विभाग की इस पहल को औषधि कारोबार में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नवरात्रि से पहले थोक दवा कारोबारियों को भी राहत

इसी आदेश में दवा कारोबार से जुड़े व्यापारियों के लिए भी राहत का फैसला किया गया है। 23 जुलाई 2026 को जारी आदेश के संदर्भ में आगामी नवरात्रि त्योहार को देखते हुए व्यापारियों के हित में 11 अक्टूबर 2026 से नए थोक बिक्री लाइसेंस जारी किए जाने पर लगी रोक हटाने का निर्णय लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को इस निर्णय के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दवा कारोबार में जवाबदेही बढ़ाने की कवायद

एक ओर रिटेल फार्मेसियों की लाइसेंस, फार्मासिस्ट और स्टॉक संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की तैयारी है, तो दूसरी ओर अस्पताल फार्मेसियों में दवाओं की खरीद और बिक्री दर प्रदर्शित करने की व्यवस्था मरीजों के हित में अहम मानी जा रही है। इससे दवा खरीदने वाले लोगों को कीमतों की बेहतर जानकारी मिलेगी और फार्मेसी व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल सकती है।