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हापुड़ में सरकारी यूरिया की बड़ी बरामदगी, 184 कट्टों ने खोली संदिग्ध भंडारण की परत; जांच तेज

हापुड़। बुलंदशहर रोड पर जिला कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 184 कट्टे सरकारी यूरिया बरामद किए हैं। जिला कृषि अधिकारी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी यूरिया एक स्थान पर मिलने से विभागीय अमले में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह यूरिया दूसरे जनपद से हापुड़ लाकर स्टॉक किया गया था। मौके पर यूरिया को पीसकर आगे सप्लाई किए जाने की तैयारी से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। कृषि विभाग ने अब बरामद स्टॉक के स्रोत से लेकर उसकी संभावित सप्लाई तक की पूरी कड़ी खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दूसरे जनपद से हापुड़ पहुंचा यूरिया, अब स्रोत की पड़ताल

जांच में सबसे पहले इस बात की पड़ताल की जा रही है कि बरामद 184 कट्टे यूरिया मूल रूप से किस जनपद और किस केंद्र से संबंधित हैं। कृषि विभाग स्टॉक से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज, बिल, चालान और अन्य रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने में जुटा है कि यूरिया किस माध्यम से हापुड़ तक पहुंचा। यदि परिवहन के दस्तावेज उपलब्ध होते हैं तो उनके आधार पर वाहन, चालक और संबंधित व्यक्तियों की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। विभाग यह भी देख रहा है कि जिस स्थान पर यूरिया मिला, वहां इतनी बड़ी मात्रा में स्टॉक रखने की अनुमति या वैध रिकॉर्ड मौजूद था या नहीं।

स्टॉक रजिस्टर और दस्तावेजों का होगा मिलान

बरामद यूरिया के संबंध में कृषि विभाग दस्तावेजी जांच को भी अहम मान रहा है। टीम यह मिलान कर रही है कि मौके पर उपलब्ध स्टॉक और कागजों में दर्ज मात्रा में कोई अंतर तो नहीं है। इसके साथ ही यूरिया की खरीद, भंडारण और संभावित बिक्री या स्थानांतरण से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। दस्तावेजों में सामने आने वाली जानकारी को मौके से बरामद सामग्री से मिलाकर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा।

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नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे जाएंगे, रिपोर्ट पर टिकी निगाह

बरामद यूरिया के नमूने लिए जा रहे हैं, जिन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। नमूनों की जांच से यूरिया की गुणवत्ता और मानकों के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी। विभागीय कार्रवाई में प्रयोगशाला रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसके आधार पर बरामद सामग्री से जुड़े तकनीकी तथ्यों की पुष्टि की जा सकेगी। रिपोर्ट आने के बाद जांच अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों और मौके से मिले अन्य साक्ष्यों के साथ उसका मिलान करेंगे।

यूरिया की पिसाई क्यों हो रही थी, इस एंगल पर भी जांच

मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु यूरिया को पीसकर आगे सप्लाई किए जाने की तैयारी से जुड़ा है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि यूरिया को किस उद्देश्य से पीसा जा रहा था और उसका संभावित इस्तेमाल कहां किया जाना था। प्रारंभिक जानकारी में इसके मुर्गी दाने में इस्तेमाल किए जाने की आशंका सामने आई है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल करेगी कि पिसाई की प्रक्रिया में कौन लोग शामिल थे और तैयार सामग्री की सप्लाई किसे की जानी थी।

सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटा कृषि विभाग

जांच अब केवल मौके से बरामद 184 कट्टों तक सीमित नहीं है। कृषि विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस स्टॉक की सप्लाई चेन कहां से शुरू हुई और इसका अंतिम गंतव्य क्या था। इसके लिए उपलब्ध दस्तावेजों, परिवहन संबंधी जानकारी और संबंधित व्यक्तियों से प्राप्त तथ्यों का मिलान किया जा सकता है। यदि जांच में कोई अतिरिक्त स्थान, स्टॉक या संबंधित व्यक्ति सामने आता है तो विभागीय स्तर पर उसकी भी पड़ताल की जाएगी।

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भंडारण स्थल की भी होगी पड़ताल, आसपास के इनपुट जुटाए जाएंगे

जिस स्थान से यूरिया बरामद हुआ है, वहां भंडारण की परिस्थितियों और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। विभाग यह समझने का प्रयास कर रहा है कि स्टॉक कितने समय से वहां रखा था और वहां यूरिया की पिसाई अथवा अन्य प्रक्रिया कब से चल रही थी। उपलब्ध रिकॉर्ड और मौके से मिले तथ्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ी तैयार की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

जांच पूरी होने के बाद तय होगी कार्रवाई की दिशा

फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद यूरिया को जांच के दायरे में लेते हुए दस्तावेजी और तकनीकी दोनों स्तरों पर पड़ताल शुरू कर दी है। 184 कट्टे सरकारी यूरिया की बरामदगी, दूसरे जनपद से उसके हापुड़ पहुंचने की जानकारी और उसे पीसकर आगे सप्लाई किए जाने की आशंका—तीनों बिंदु जांच के केंद्र में हैं। अब प्रयोगशाला रिपोर्ट, दस्तावेजों के सत्यापन और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में नियमों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ और जिम्मेदारी किन लोगों की बनती है। इसके बाद विभाग उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा।