राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

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नाला बंद, खेत जलमग्न और फसलें बर्बाद—किसानों के सामने भुखमरी का संकट

हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर तहसील क्षेत्र के बलवापुर-पसवाड़ा रोड पर स्थित वनतारा फार्म को लेकर आसपास के गांवों के किसानों में गहरी चिंता है। किसानों का आरोप है कि फार्म में प्रस्तावित कॉलोनी के विस्तार की तैयारी के बीच सैकड़ों वर्ष पुराने प्राकृतिक नाले को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक यह नाला बरसात और बाढ़ के पानी को जंगल क्षेत्र से निकालकर पूठ गंगा तक पहुंचाने का प्राकृतिक माध्यम रहा है।

नाला बंद होने के बाद जलनिकासी बाधित होने से आसपास के खेतों में पानी जमा हो गया है।प्राकृतिक जलनिकासी का रास्ता बंद होने से बढ़ी मुश्किल किसानों का कहना है कि नाले को मिट्टी से बंद कर उसके आसपास की भूमि को समतल कर दिया गया है तथा पानी के प्रवाह को रोकने के लिए बांधनुमा अवरोध खड़ा कर दिया गया। इसके चलते बरसात और बाढ़ का पानी खेतों में ही ठहर रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार पहले पानी इसी प्राकृतिक रास्ते से आगे निकल जाता था, लेकिन अब निकासी प्रभावित होने से हजारों बीघा कृषि भूमि जलभराव की चपेट में आ गई है।आठ गांवों के किसानों की फसल पर संकट बलवापुर, आलमगीरपुर, मोहम्मदपुर, रुस्तमपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा, सरदारों की मढ़ैया और आलमनगर सहित आसपास के गांवों के किसानों ने जलभराव से कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की बात कही है। किसानों के अनुसार खेतों में पानी भरा रहने से धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है।

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यदि जलभराव लंबे समय तक जारी रहा तो गेहूं की आगामी फसल की बुवाई और उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।फसल गई तो परिवार की रोजी-रोटी पर आएगा संकट किसानों का कहना है कि उनकी आय का सबसे बड़ा आधार खेती है। फसलें लगातार खराब होती रहीं तो सैकड़ों किसान परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

किसानों का सवाल है कि यदि जलभराव के कारण उनकी फसल नष्ट होती है तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा और प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से किस स्तर पर सहायता मिलेगी।बच्चों की पढ़ाई और परिवार की परवरिश पर भी असर की चिंता ग्रामीणों का कहना है कि खेती चौपट होने का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि आय प्रभावित होने से बच्चों की शिक्षा, परिवार का भरण-पोषण, कृषि संबंधी खर्च और अन्य जरूरी जिम्मेदारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसे में किसानों ने प्रशासन से मामले को केवल जलभराव की समस्या न मानकर हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा विषय मानते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।प्रशासन से मौके पर जांच और नाला खुलवाने की मांग किसानों ने प्रशासन से पुराने नाले की वास्तविक स्थिति का मौके पर निरीक्षण कराने, जलनिकासी मार्ग की जांच करने और यदि नियमों के विपरीत अवरोध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

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किसानों का कहना है कि सबसे पहले खेतों से पानी निकालने की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि बची हुई फसलों को और नुकसान से बचाया जा सके।किसानों के सामने कई सवाल, जवाब का इंतजार ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि प्रभावित खेतों का सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन कराया जाए।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि प्राकृतिक नाले को बंद करने की अनुमति किस आधार पर दी गई और जलनिकासी बाधित होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नाले की निकासी व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।

अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। क्या पुराने जलनिकासी मार्ग की जांच होगी? क्या बंद नाले को खुलवाकर पानी की निकासी बहाल की जाएगी? और यदि किसानों की फसलें जलभराव से बर्बाद हुई हैं तो उन्हें नियमानुसार मुआवजा मिलेगा? इन सवालों के जवाब का किसानों को इंतजार है।