राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
धन की दौड़ में धर्म और परिवार को न भूलें, जीवन में संतुलन जरूरी: योगेश वैदिक
हापुड़। जनपद हापुड़ के पिलखुवा के चंडी रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में 50वें वार्षिकोत्सव के तहत चल रहे यजुर्वेद पारायण यज्ञ में गुजरात के रोजड़ से पहुंचे योगेश वैदिक ने श्रद्धालुओं को जीवन में धर्म, परिवार और आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आजीविका कमाना मनुष्य की आवश्यकता है, लेकिन धन अर्जित करने की दौड़ में धर्म और परिवार की जिम्मेदारियों को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
आजीविका के साथ धर्म और परिवार की जिम्मेदारी भी जरूरीयोगेश वैदिक ने कहा कि मनुष्य को अपनी आजीविका के प्रति ईमानदार रहते हुए परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करना चाहिए। जीवन में केवल आर्थिक सफलता को ही अंतिम लक्ष्य मान लेना उचित नहीं है। परिवार के प्रति जिम्मेदारी, धार्मिक संस्कार और सामाजिक सरोकार व्यक्ति के जीवन को संतुलित और सार्थक बनाते हैं।धन की दौड़ बढ़ा रही पारिवारिक और सामाजिक दूरियां उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग अधिक से अधिक धन कमाने की होड़ में परिवार और धर्म से जुड़े दायित्वों से दूर होते जा रहे हैं।
इसका असर पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भौतिक सुविधाओं के साथ रिश्तों और संस्कारों को मजबूत रखना भी उतना ही आवश्यक है।दान में वस्तु से ज्यादा भावना का महत्वदान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए योगेश वैदिक ने कहा कि केवल पूजा-पाठ करना या किसी व्यक्ति को वस्तु दे देना ही दान की पूर्ण भावना नहीं है।
दान के पीछे सेवा, परोपकार और जरूरतमंद की सहायता की सच्ची भावना होनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से किया गया दान ही समाज के लिए वास्तविक उपयोगी साबित होता है।यज्ञ में शुद्ध सामग्री के प्रयोग पर दिया जोरयोगेश वैदिक ने धार्मिक अनुष्ठानों में शुद्ध सामग्री के प्रयोग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ में घी, मेवा-मिष्ठान और अन्य सामग्री की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
धार्मिक अनुष्ठान केवल परंपरा निभाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से व्यक्ति में सकारात्मक विचार और अच्छे संस्कारों का विकास होना चाहिए।कर्म और भावना के अनुरूप मिलते हैं जीवन में परिणाम उन्होंने कहा कि मनुष्य के कर्म और उसके पीछे की भावना का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ईमानदारी, सेवा और परोपकार की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
धर्म, परिवार और आजीविका के बीच संतुलन बनाकर चलने वाला जीवन व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सार्थक हो सकता है।यज्ञ में मौजूद रहे आर्य समाज से जुड़े पदाधिकारी और श्रद्धालु यजुर्वेद पारायण यज्ञ में अशोक सिंघल, सुभाष चंद्र आर्य, पूर्व मंत्री प्रेमचंद आर्य, विजय आर्य, रोशन लाल आर्य, देवीदास आर्य, रविंद्र उत्साही, सत्यप्रकाश आर्य, अजय आर्य और यश कंसल सहित आर्य समाज से जुड़े पदाधिकारी एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
