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पिलखुवा में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत का फैसला, दो दोषियों को 20-20 साल का कारावास

हापुड़/पिलखुवा। वर्ष 2018 में पिलखुवा क्षेत्र में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में करीब आठ साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।अभियोजन पक्ष के अनुसार, पिलखुवा क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहने वाले व्यक्ति ने पुलिस को घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शिकायत में बताया गया था कि वह अपनी पत्नी, 15 वर्षीय पुत्री और अन्य बच्चों के साथ किराये के मकान में रहता था। काम के सिलसिले में उसे अक्सर घर से बाहर रहना पड़ता था। इसी दौरान जुलाई 2018 में घर में मौजूद किशोरी के साथ घटना होने का आरोप सामने आया था।देर रात घर में हुई थी वारदात मामले के अनुसार, 11 जुलाई 2018 की देर रात करीब एक बजे किशोरी घर में सो रही थी।

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इसी दौरान दोनों आरोपियों पर नशीला पदार्थ देकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगा। किशोरी के शोर मचाने पर उसकी मां की नींद खुल गई और उसने घटना का विरोध किया।विरोध करने पर मां के साथ भी मारपीट का आरोप अभियोजन के मुताबिक, घटना का विरोध करने पर आरोपियों ने किशोरी की मां के साथ भी मारपीट की। जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोगों ने पुलिस से शिकायत की।

पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की और जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों व बयानों को संकलित करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सुनाया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना।

इसके बाद अदालत ने प्रत्येक दोषी को 20 वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त सजा अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। फैसले के बाद वर्ष 2018 से लंबित यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा तक पहुंचा। पॉक्सो अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

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