राष्ट्र संवाद टाइम्स : riyaz ahmad :
हापुड़। पिलखुवा के एक स्थानीय क्षेत्र में छह वर्षीय बच्ची से कथित यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। परिवार की शिकायत में दो किशोरों पर अलग-अलग घटनाओं के दौरान बच्ची के साथ अश्लील हरकत करने और दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगाया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पुलिस की विवेचना जारी है, जबकि पीड़िता की पहचान और निजता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समाचार में पहचान उजागर करने वाले विवरणों से परहेज किया गया है।
चॉकलेट का बहाना बनाकर छत पर ले जाने का आरोप
परिवार की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, पहली घटना में एक किशोर बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने छत पर ले गया। आरोप है कि वहां उसके साथ अश्लील हरकत करते हुए दुष्कर्म का प्रयास किया गया। शिकायत में दर्ज आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर रही है।
दूसरे किशोर पर घर बुलाकर गलत हरकत करने का आरोप
शिकायत में एक अन्य किशोर पर भी बच्ची को अपने घर बुलाकर उसके साथ गलत हरकत करने का आरोप लगाया गया है। परिवार ने दोनों घटनाओं को गंभीर बताते हुए पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस की जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित वास्तविक तथ्य क्या हैं।
मां को जानकारी देने के बाद पुलिस तक पहुंचा मामला
बताया गया है कि बच्ची ने 21 सितंबर की शाम अपनी मां को कथित घटनाओं की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पिलखुवा कोतवाली पहुंचकर पुलिस को शिकायत दी। शिकायत मिलने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार बालियान के नेतृत्व में जांच
कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार बालियान के नेतृत्व में पुलिस मामले की जांच कर रही है। विवेचना की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक राहुल कुमार सिसोदिया को सौंपी गई है। पुलिस शिकायत में उल्लिखित घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित परिस्थितियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई, जांच के निष्कर्षों पर नजर
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। फिलहाल पुलिस की ओर से जांच के निष्कर्षों की प्रतीक्षा है।
पीड़िता की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना जरूरी
नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा के लिए समाचार में उसका नाम, परिवार की पहचान, आरोपियों के नाम, मोहल्ला और अन्य पहचान उजागर करने वाले विवरण शामिल नहीं किए गए हैं। पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 के तहत बाल पीड़िता की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करने पर रोक है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग करते समय पीड़िता की गरिमा, निजता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी कानूनी प्रक्रिया
मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। समाचार में आरोपों और जांच के निष्कर्षों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आवश्यक है, ताकि रिपोर्टिंग तथ्यात्मक और जिम्मेदार बनी रहे।
