राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी अहम पहल, सरस्वती इंस्टीट्यूट में दवा प्रतिक्रियाओं की पहचान का प्रशिक्षण
पिलखुवा (हापुड़)। दवाओं के इस्तेमाल के दौरान होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की समय पर पहचान और सही रिपोर्टिंग मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पिलखुवा में छठे राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह के अवसर पर फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम में चिकित्सा विद्यार्थियों, नर्सिंग स्टाफ और फैकल्टी सदस्यों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (एडीआर) की पहचान, दस्तावेजीकरण, फॉर्म भरने और भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) के अंतर्गत रिपोर्टिंग की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य दवा सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत करना रहा।
दवा सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षण, रिपोर्टिंग प्रक्रिया समझाईकार्यक्रम एनसीसी, आईपीसी, गाजियाबाद, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को दवाओं के उपयोग के दौरान सामने आने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की पहचान करने, आवश्यक जानकारी दर्ज करने और संबंधित एडीआर फॉर्म भरने की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई। वक्ताओं ने कहा कि फार्माकोविजिलेंस दवाओं की सुरक्षा, तर्कसंगत औषधि उपयोग और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सही समय पर प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग से दवा सुरक्षा से जुड़े मामलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।कार्यशाला में संस्थान की प्रधानाचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. चरनजीत सिंह अहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, जनरल मैनेजर श्री एन. वर्धराजन तथा डायरेक्टर श्री रघुवार दत्त सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी और नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान दवा सुरक्षा और प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग के महत्व पर चर्चा की गई।
सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षणकार्यशाला में प्रतिभागियों को उदाहरणों के माध्यम से एडीआर फॉर्म भरने और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की पहचान और समयबद्ध रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान करना रहा। इस दौरान सुरक्षित दवा उपयोग और रोगी सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाई गई।
इंटरैक्टिव क्विज में विद्यार्थियों और नर्सिंग स्टाफ ने लिया हिस्साप्रशिक्षण सत्र के बाद फार्माकोविजिलेंस एवं प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया रिपोर्टिंग विषय पर इंटरैक्टिव क्विज का आयोजन किया गया। इसमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा नर्सिंग स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। क्विज के माध्यम से प्रतिभागियों के ज्ञान का आकलन किया गया और दवा सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को सहभागितापूर्ण तरीके से दोहराया गया।
फार्माकोलॉजी विभाग की टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिकाकार्यक्रम का समन्वय फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कविता धर बगाती ने अपनी टीम के साथ किया। आयोजन में डॉ. शाकिता फातिमा, डॉ. तबिंदा नज़ीर, डॉ. पूनम सिंह, डॉ. अंकित अग्रवाल, डॉ. सोनाक्षी सिंह, डॉ. तरुण शर्मा, डॉ. श्रेया सक्सेना, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. उत्कर्ष हरि, डॉ. अखिलदास, डॉ. सुरभि एवं डॉ. दीपक ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजकों ने संस्थान के चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन एवं वाइस-चेयरपर्सन डॉ. रम्या रामचंद्रेन के निरंतर मार्गदर्शन, सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को फार्माकोविजिलेंस की भूमिका, सुरक्षित दवा उपयोग और प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं की प्रभावी रिपोर्टिंग के महत्व की जानकारी मिली। संस्थान ने इस आयोजन के जरिए रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
