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सरकारी ठेकों में अब नहीं चलेगी मनमानी, हापुड़ पुलिस ने लागू किए कड़े नियम; चरित्र सत्यापन और गुणवत्ता जांच के बाद ही मिलेगा काम

हापुड़। सरकारी कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में हापुड़ पुलिस ने ठेकेदारों के लिए निविदा प्रक्रिया को लेकर कड़े प्रावधान तय किए हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी निविदा सूचना में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी ठेका हासिल करने के लिए केवल न्यूनतम दर प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित ठेकेदार की पात्रता, दस्तावेजों की वैधता, चरित्र सत्यापन और कार्य की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण आधार होंगे। नियमों के पालन के बाद ही संबंधित फर्म को काम मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

चरित्र सत्यापन के बाद ही निविदा प्रक्रिया में भागीदारी

निविदा प्रक्रिया में शामिल होने वाले ठेकेदारों को आधार कार्ड, पैन कार्ड, जीएसटी पंजीकरण प्रमाण-पत्र और संबंधित कार्यालय में पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही चरित्र सत्यापन प्रमाण-पत्र भी अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी कार्यों से जुड़ी एजेंसियों की पात्रता और विश्वसनीयता की जांच को निविदा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है, ताकि निर्धारित नियमों के अनुरूप ही ठेकेदारों को कार्य सौंपा जा सके।

ब्लैकलिस्ट फर्मों और अपात्र आवेदकों पर रहेगी रोक

निविदा की शर्तों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आपराधिक रिकॉर्ड अथवा संबंधित नियमों के तहत अपात्र पाए जाने वाले व्यक्तियों या फर्मों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी तरह राज्य सरकार की ब्लैकलिस्ट में दर्ज फर्मों और व्यक्तियों को भी निविदा प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। दस्तावेजों और पात्रता की जांच के दौरान यदि कोई जानकारी गलत अथवा अपूर्ण पाई जाती है तो संबंधित निविदादाता की पात्रता नियमों के अनुसार प्रभावित हो सकती है।

काम की गुणवत्ता जांचने के लिए होगी नियमित निगरानी

सरकारी कार्य आवंटित होने के बाद भी ठेकेदार की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। विभाग की ओर से कार्य की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुपालन की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए गठित समिति समय-समय पर कार्यस्थल का निरीक्षण कर सकती है। यदि निर्माण या अन्य कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो निविदा की शर्तों के अनुसार संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

समय पर काम पूरा नहीं हुआ तो नियमों के तहत लगेगा जुर्माना

निविदा स्वीकृत होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा करना ठेकेदार के लिए अनिवार्य होगा। कार्य में अनावश्यक देरी होने की स्थिति में निविदा की शर्तों और विभागीय नियमों के अनुसार पेनल्टी लगाए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा कार्य में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर लागू जीएसटी की कटौती भी नियमानुसार भुगतान के समय की जाएगी। इससे कार्य की समयसीमा और वित्तीय नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।

10 प्रतिशत सिक्योरिटी मनी जमा करना होगा जरूरी

जारी निविदा शर्तों के अनुसार निविदा स्वीकृत होने के बाद ठेकेदार को कुल राशि का 10 प्रतिशत सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा कराना होगा। यह व्यवस्था कार्य को निर्धारित शर्तों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा कराने के लिए रखी गई है। निविदादाता को सभी निर्धारित शर्तों को स्वीकार करते हुए सहमति-पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। शर्तों का पालन नहीं करने की स्थिति में विभागीय प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस अधीक्षक के पास रहेगा निविदा स्वीकार या निरस्त करने का अधिकार

निविदा सूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी निविदा को स्वीकार करने अथवा निरस्त करने का अंतिम अधिकार पुलिस अधीक्षक के पास सुरक्षित रहेगा। आवश्यकता के अनुसार विभाग निविदा प्रक्रिया से संबंधित शर्तों में संशोधन भी कर सकता है। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक निविदादाता के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों को पढ़कर उनकी स्वीकृति देना आवश्यक होगा। पुलिस विभाग की यह प्रक्रिया सरकारी कार्यों में नियमबद्धता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।