राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

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मेरठ कैंट में ‘रक्षक संवाद’ ने जोड़ा सेना, पूर्व सैनिक और डिजिटल जगत, राष्ट्रहित में जिम्मेदार संवाद पर हुआ मंथन

मेरठ। मेरठ कैंट स्थित 56 फील्ड रेजिमेंट की ओर से ‘रक्षक संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सैन्य वेटरन्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य सेना, पूर्व सैनिकों और डिजिटल माध्यम से जुड़े प्रभावशाली लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना रहा, ताकि राष्ट्रहित, जिम्मेदार संवाद और आपसी समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हो सके। कार्यक्रम में सैन्य सेवा से जुड़े अनुशासन, अनुभव और राष्ट्र के प्रति समर्पण को समाज तक पहुंचाने के साथ डिजिटल माध्यमों की सकारात्मक भूमिका पर भी विचार साझा किए गए।

कार्यक्रम में उपस्थित वेटरन्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का स्वागत करते हुए 56 फील्ड रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल नवीन कुमार शर्मा ने कहा, “हम सभी एक परिवार हैं।” उन्होंने कहा कि सेना, पूर्व सैनिकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच मजबूत जुड़ाव देश की सामूहिक शक्ति को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राष्ट्रीय संकट अथवा किसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में पूरे राष्ट्र का एकजुट होकर खड़ा होना देश की सबसे बड़ी ताकत है।

सैन्य अनुभव और डिजिटल पहुंच को जोड़ने पर जोर

‘रक्षक संवाद’ में पूर्व सैनिकों के लंबे सैन्य अनुभव और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की व्यापक डिजिटल पहुंच को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि वेटरन्स के पास अनुशासन, नेतृत्व, सेवा और कठिन परिस्थितियों से निपटने का समृद्ध अनुभव है। इन अनुभवों को समाज और युवा पीढ़ी तक पहुंचाकर उन्हें सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है। वहीं सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। संवाद के दौरान यह विचार सामने आया कि सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच का उपयोग राष्ट्रहित से जुड़े सकारात्मक संदेशों, सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदार संवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

सैनिकों का उत्साह, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा बना प्रेरणा का आधार

कार्यक्रम के दौरान सैन्य जीवन से जुड़े अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, साहस और राष्ट्रसेवा की भावना को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। सैनिक कठिन से कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश की सुरक्षा और सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं। सैन्य सेवा का यह अनुशासन केवल सीमा की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूर्व सैनिक अपने अनुभवों के माध्यम से समाज और युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश भी देते हैं। ‘रक्षक संवाद’ में मौजूद वेटरन्स के अनुभवों और संवाद में उनकी सक्रिय भागीदारी से सैन्य जीवन की इसी प्रतिबद्धता और उत्साह की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम ने यह संदेश भी सामने रखा कि राष्ट्र की मजबूती केवल संस्थागत प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग, जिम्मेदारी और सकारात्मक संवाद से भी मजबूत होती है।

एक मंच पर दिखी सैन्य अनुभव और डिजिटल प्रभाव की साझेदारी

कार्यक्रम में सेना और पूर्व सैनिकों के अनुभवों को डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक समाज तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इस दौरान आपसी संवाद, समन्वय और सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ‘रक्षक संवाद’ के माध्यम से सैन्य पृष्ठभूमि और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच संवाद का अवसर मिला। वेटरन्स के अनुभव और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहुंच को सकारात्मक दिशा में जोड़ने पर जोर देते हुए राष्ट्रहित से जुड़े विषयों को जिम्मेदारी के साथ समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।

वेटरन्स समेत कई प्रमुख लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में अखिल भारतीय भूतपूर्व सैनिक विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष वेटरन के. सिंह, डिप्टी डायरेक्टर (जीएस अस्पताल) मनोज सिसौदिया, मीडिया प्रभारी वेटरन गजेंद्र सिंह तोमर, वेटरन ओमपाल सिंह, चंद्र सिंह, सुखबीर सिंह, राजेंद्र सिंह, बिशन पाल सिंह तोमर, नानक चंद, अमरीश शर्मा, राजेंद्र सिंह हापुड़, शाहिद अली और अजय पाल सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा कान्हा श्याम के इंचार्ज बाबी मित्तल भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

‘रक्षक संवाद’ में हुए विचार-विमर्श ने सेना, पूर्व सैनिकों और डिजिटल जगत के बीच संवाद एवं समन्वय की संभावनाओं को सामने रखा। कार्यक्रम में राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर जिम्मेदार संवाद, सकारात्मक डिजिटल सहभागिता और सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया। सैन्य वेटरन्स के अनुभवों तथा सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच को एक मंच पर लाने वाली यह पहल संवाद के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने की दिशा में केंद्रित रही।