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बच्चों की सुरक्षा पर कानून का कवच, स्कूलों में POCSO की पाठशाला; अधिकारों से रूबरू हुए छात्र-छात्राएं

हापुड़। बच्चों को बाल यौन अपराधों से सुरक्षित रखने और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने POCSO एक्ट को लेकर जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजय कुमार सिंह प्रथम के निर्देशन में जिले के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को बाल यौन अपराधों से बचाव, कानूनी संरक्षण और शिकायत की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।

कानूनी अधिकारों की जानकारी से मजबूत होगी बच्चों की सुरक्षा अभियान के तहत बच्चों को यह संदेश दिया जा रहा है कि किसी भी अनुचित व्यवहार, दबाव या धमकी की स्थिति में चुप्पी साधने के बजाय तत्काल माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दो विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने संभाली जागरूकता की कमान इसी क्रम में 29 सितंबर 2026 को सिविल जज (जू.डि.) हापुड़ श्रीमती शैली शरण ने पीएम श्री इन्दरा कन्या कम्पोजिट विद्यालय, रघुवीर गंज फुलगढ़ी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। वहीं अपर सिविल जज (जू.डि.) गढ़मुक्तेश्वर श्री पंकज कुमार द्वितीय ने कम्पोजिट विद्यालय अठसैनी में पहुंचकर विद्यार्थियों को POCSO एक्ट के महत्वपूर्ण प्रावधानों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।

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18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मिला कानून के संरक्षण का पाठकार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि POCSO एक्ट के तहत 18 वर्ष से कम आयु का प्रत्येक व्यक्ति बच्चा माना जाता है। बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाते हुए लैंगिक अपराधों से बचाव के उपाय बताए गए। उन्हें यह भी समझाया गया कि किसी भी असहज परिस्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति से सहायता लेनी चाहिए।

ऑनलाइन दुनिया में भी सतर्क रहने का दिया संदेश जागरूकता कार्यक्रम में सोशल मीडिया और साइबर सुरक्षा को लेकर भी विद्यार्थियों को विशेष रूप से सावधान किया गया। बच्चों को निजी जानकारी साझा करने में सतर्कता बरतने, सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने तथा साइबर उत्पीड़न की स्थिति में सहायता लेने के उपाय बताए गए।

इसके साथ ही बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्या और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।डर और दबाव में नहीं, खुलकर बताएं अपनी परेशानी न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि किसी बच्चे को असहज स्थिति, दबाव, धमकी या अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़े तो वह डरकर चुप न रहे। ऐसी स्थिति में माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल जानकारी देना जरूरी है।

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बच्चों को शिकायत की प्रक्रिया के साथ पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में भी बताया गया।1 अक्टूबर तक चलेगा अभियान का पहला चरण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पीएलवी गौरव सहगल, राकेश कुमार और धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि अभियान का प्रथम चरण 1 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य बच्चों को POCSO कानून और उनके अधिकारों की जानकारी देने के साथ विद्यालयों में सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे बिना भय और झिझक अपनी बात रख सकें।

बच्चों की सुरक्षा में समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी अभियान के दौरान यह संदेश दिया जा रहा है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय पर जागरूकता, कानून की सही जानकारी और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता बच्चों को अपराध एवं शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विद्यालयों में लगातार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों और शिक्षकों को उनके अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।