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कश्मीर के साहित्यिक मंच पर हापुड़ की दस्तक, पिलखुवा के अशोक गोयल ने संभाली कवि सम्मेलन की अध्यक्षता

हापुड़/जम्मू-कश्मीर। श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम के तत्वावधान में कश्मीर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य, राष्ट्रभाव, वीरता, शांति और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों को स्वर दिया। इस साहित्यिक आयोजन में जनपद हापुड़ के पिलखुवा निवासी वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल चक्रवर्ती ने अध्यक्षता की। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए रचनाकारों की मौजूदगी के बीच हुए सम्मेलन में काव्य पाठ और साहित्यिक प्रस्तुतियां कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहीं।

पिलखुवा के साहित्यकार ने संभाली अध्यक्षीय जिम्मेदारी

कश्मीर में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक कार्यक्रम में पिलखुवा निवासी अशोक गोयल की अध्यक्षीय भूमिका हापुड़ जनपद के लिए उल्लेखनीय रही। साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय गोयल ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों के साथ मंच साझा किया। उनकी अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में रचनाकारों ने अपनी-अपनी कविताओं के माध्यम से मातृभूमि, वीरता, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक विषयों को अभिव्यक्ति दी।

राष्ट्रभाव और वीर रस की कविताओं ने बांधा समां

कवि सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं में राष्ट्रप्रेम और वीर रस से जुड़े काव्य को प्रमुख स्थान मिला। कवियों ने मातृभूमि के प्रति सम्मान, सैनिकों के बलिदान, सामाजिक एकता तथा कश्मीर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। काव्य पाठ के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने तालियों के माध्यम से कवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में कविता की विभिन्न विधाओं और शैलियों का भी प्रभाव दिखाई दिया।

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आयोजकों ने साहित्य को बताया संवाद का सशक्त माध्यम

आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य साहित्य और कविता के माध्यम से शांति, सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक जुड़ाव तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्ति देना था। आयोजकों ने कहा कि साहित्य विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद स्थापित करने और साझा सांस्कृतिक भावनाओं को सामने लाने का प्रभावी माध्यम है। इसी उद्देश्य के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों के साहित्यकारों को कश्मीर में आयोजित इस मंच पर आमंत्रित किया गया।

स्थानीय सहभागिता को लेकर आयोजकों का दावा

आयोजकों के दावे के अनुसार, कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर भी लोगों की सहभागिता रही और राष्ट्रप्रेम से संबंधित काव्य प्रस्तुतियों को श्रोताओं की सराहना मिली। हालांकि, स्थानीय सहभागिता की संख्या अथवा व्यापकता को लेकर आयोजकों की ओर से कोई स्वतंत्र आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है। लिहाजा इस हिस्से को आयोजकों के दावे के रूप में ही देखा जाना उचित होगा।

मंच पर मौजूद रहे प्रमुख अतिथि और साहित्यकार

कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक गोयल चक्रवर्ती ने की। संस्था की राष्ट्रीय प्रभारी कवयित्री बीना गोयल मंच पर मौजूद रहीं। अनिल गोयल मुख्य अतिथि रहे, जबकि सुधीर बंसल, डॉ. संजय जैन और डॉ. डीके वशिष्ठ ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। अतिथियों और साहित्यकारों ने काव्य प्रस्तुतियों को सुना तथा आयोजन के दौरान साहित्य की सामाजिक भूमिका से जुड़े विषयों पर विचार व्यक्त किए।

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देशभर के रचनाकारों ने प्रस्तुत कीं साहित्यिक रचनाएं

कवि सम्मेलन में अशोक गोयल, बीना गोयल, मंजू गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता, शशि किरण गुप्ता, कुमकुम वशिष्ठ, मधु चौबे, महेंद्र शर्मा, दीपा शर्मा, प्रमोद गर्ग, रामनाथ चौबे, डॉ. संजय जैन, सुनील कुमार शर्मा, उर्मिल गोयल, योगेंद्र अग्रवाल, निकिता, उमेश इंदु और प्रतीक भारद्वाज सहित अन्य साहित्यकारों ने सहभागिता की। रचनाकारों ने अपनी-अपनी काव्य शैली में विभिन्न विषयों को प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम को साहित्यिक विविधता प्रदान की।

कश्मीर से पिलखुवा तक जुड़ा साहित्यिक संवाद

इस आयोजन में पिलखुवा निवासी अशोक गोयल की अध्यक्षीय भूमिका के चलते हापुड़ जनपद का भी प्रतिनिधित्व रहा। कश्मीर के साहित्यिक मंच पर पिलखुवा से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार की मौजूदगी ने स्थानीय साहित्यिक गतिविधियों को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से जोड़ने का अवसर प्रदान किया। सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रचनाकारों के बीच विचार और साहित्यिक अभिव्यक्तियों का आदान-प्रदान हुआ।

समापन पर अशोक गोयल ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि अशोक गोयल ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने साहित्य को सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सकारात्मक चिंतन को विस्तार देने वाली प्रभावशाली विधा बताया। कार्यक्रम का समापन साहित्यकारों की सहभागिता और परस्पर संवाद के साथ हुआ।