राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :
हरित भारत की बड़ी पहल: विद्या भारती ने खींची पर्यावरण संरक्षण की मजबूत लकीर, 1.20 लाख पौधों से लेकर सोलर विद्यालयों तक बनेगा मॉडल
हापुड़-मेरठ। प्रकृति को बचाने की मुहिम अब केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यालयों से निकलकर समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगी। पर्यावरण संरक्षण को संस्कार, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता से जोड़ते हुए विद्या भारती ने वर्ष 2047 तक विकसित, स्वच्छ और सुंदर भारत के निर्माण की दिशा में व्यापक हरित कार्ययोजना तैयार की है। कच्छ, गुजरात में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय पर्यावरण कार्यकर्ता कार्यशाला में देश के 26 प्रांतों से पहुंचे 50 पर्यावरणविदों ने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न आयामों पर गहन मंथन किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ प्रांत की ओर से प्रांत प्रमुख अरविंद भाई ओझा, क्षेत्रीय प्रमुख शिवम गोयल एवं गोविंद गुप्ता ने सहभागिता की।
कच्छ के कुकमा स्थित रामकृष्ण ट्रस्ट के परिसर में आयोजित कार्यशाला में प्राकृतिक कृषि, गौशाला, गौ आधारित औषधियां, पंचगव्य प्राकृतिक चिकित्सा, गायों की नस्ल सुधार तथा वृक्षों के दुर्लभ बीजों के संरक्षण और उत्पादन से जुड़े कार्यों का प्रतिभागियों ने अवलोकन किया। मनोज भाई सोलंकी के मार्गदर्शन में संचालित ट्रस्ट की गतिविधियों को प्रकृति आधारित जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी उदाहरण बताया गया।
विद्यालयों से निकलेगा पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा अभियान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद महंत ने कहा कि देशभर के विद्यालयों में इको क्लब गठित कर पर्यावरण जागरूकता के कार्यक्रमों को गति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण का ऐसा मॉडल विकसित करना चाहिए, जो देश के अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा बने। विद्यार्थी जीवन में मिलने वाले संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं। ऐसे में यदि बाल्यावस्था से ही विद्यार्थी प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ता है तो भविष्य में वह पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएगा।
समाज की शक्ति को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण सह संयोजक राकेश जैन ने कहा कि देशभर में संघ और समाज के अनेक लोग पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। इन प्रयासों से समाज को नई दिशा मिल रही है और कई लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के पास विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और पुरातन छात्रों के रूप में व्यापक सामाजिक शक्ति है। यदि इस शक्ति को योजनाबद्ध तरीके से पर्यावरण संरक्षण के प्रकल्प से जोड़ा जाए तो इसका प्रभाव देशव्यापी स्तर पर दिखाई देगा।
‘प्रकृति परमात्मा की कृति, इसे संवारना हर मनुष्य का कर्तव्य’
मेरठ प्रांत प्रमुख अरविंद भाई ओझा ने पर्यावरण संरक्षण को जीवन और संस्कार से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति परमात्मा की रचना है और उसे संवारना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए समाज को सामूहिक रूप से आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि पूरा संसार पंचतत्वों से बना है और मानव शरीर भी पंचभूतों पर आधारित है। इसलिए इन पांचों तत्वों का संतुलन बनाए रखना मानव जीवन के सुख, स्वास्थ्य और भविष्य के लिए आवश्यक है।
उन्होंने मेरठ प्रांत में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हरित ऋषि विजयपाल बघेल, संजय कश्यप और विक्रांत शर्मा के कार्यों का उल्लेख किया। इसके साथ ही मोदीनगर नगर पालिका अध्यक्ष विनोद वैशाली द्वारा गौशाला, कूड़ा प्रबंधन, पक्षी टावर और पक्षियों के लिए जल व्यवस्था सहित किए जा रहे कार्यों को भी रेखांकित किया। आगामी कार्तिक मास में तुलसी पूजन एवं संरक्षण के लिए 400 तुलसी पौधों के वितरण का भी उल्लेख किया गया।
10 विद्यालयों में सोलर पैनल, आठ में नक्षत्र वाटिका—जमीनी स्तर पर उतरेंगे बड़े फैसले
पर्यावरण संरक्षण की कार्ययोजना को केवल कागजों तक सीमित न रखते हुए विद्यालय स्तर पर ठोस रूप देने की तैयारी है। आगामी वर्ष में 10 विद्यालयों को सोलर पैनल से युक्त करने, कुछ विद्यालयों को हरित परिसर के रूप में विकसित करने, वेस्ट मैनेजमेंट और जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा आठ विद्यालयों में नक्षत्र वाटिका स्थापित करने की योजना बनाई गई है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक कृषि जागरूकता मेले तथा दुर्लभ बीजों को संरक्षित करने के लिए बीज बैंक तैयार किया जाएगा।
कांवड़ यात्रा और गंगा मेले को भी बनाया जाएगा पर्यावरण जागरूकता का मंच
विद्या भारती ने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की रणनीति तैयार की है। सावन में निकलने वाली कांवड़ यात्रा को हरित कांवड़ यात्रा के रूप में विकसित करने के लिए यात्रा मार्ग में आने वाले विद्यालयों के माध्यम से कांवड़ शिविर संचालकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए बर्तन बैंक स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।
कार्तिक माह में आयोजित होने वाले गंगा मेले के दौरान श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। मेला समाप्त होने के बाद गंगा आरती समिति और नेहनीड़ फाउंडेशन के सहयोग से सरस्वती विद्या मंदिर गढ़मुक्तेश्वर एवं ब्रजघाट के विद्यार्थी गंगा तट पर स्वच्छता अभियान चलाएंगे।
75 वर्ष पूरे होने पर 1.20 लाख पौधे लगाने का बड़ा संकल्प
विद्या भारती के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सभी विद्यालयों के माध्यम से एक लाख बीस हजार पौधे लगाने और उनके संरक्षण की व्यापक योजना तैयार की गई है। अभियान की खास बात यह होगी कि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि पौधरोपण महज औपचारिकता बनकर न रह जाए।
2047 के विकसित भारत की नींव में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
कच्छ में हुई इस कार्यशाला ने स्पष्ट कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर विद्या भारती अब व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। विद्यालयों को केंद्र बनाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और पुरातन छात्रों की शक्ति को एकजुट करने की पहल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दे सकती है।
प्रकृति, जल, मिट्टी, वनस्पति, जैव विविधता और स्वच्छता को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह कार्ययोजना 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को स्वच्छ, सुंदर, पर्यावरण-संतुलित, समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प से जुड़ी है। संदेश साफ है—विकास की रफ्तार तभी सार्थक होगी, जब आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित प्रकृति भी बची रहे।
