राष्ट्र संवाद टाइम्स : ajay verma :

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गांव की चौखट से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं दिलकश जहां, 1500 परिवारों की बेटियों को रोजगार देने का संकल्प

हापुड़। हौसलों की उड़ान के सामने हालात की दीवारें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, मजबूत इरादों के आगे रास्ते आखिरकार खुल ही जाते हैं। जनपद हापुड़ के गांव सलई की रहने वाली दिलकश जहां की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने के दौरान सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय शिक्षा पूरी करने का संकल्प लिया। आगे चलकर यही संघर्ष उनके लिए महिला शिक्षा, स्वरोजगार और सशक्तिकरण की मुहिम की नींव बना।

संघर्ष को बनाया बेटियों के भविष्य की राह

दिलकश जहां ने अपनी परिस्थितियों से सीख लेते हुए उन बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास शुरू किया, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी थीं। उनके प्रयासों से अब तक 300 से अधिक बेटियां उच्च शिक्षा से जुड़ चुकी हैं। उनका मानना है कि किसी भी बेटी की प्रतिभा केवल इसलिए नहीं रुकनी चाहिए कि उसके सामने संसाधनों की कमी या परिस्थितियों की चुनौती खड़ी है।

डिजाइनिंग के हुनर से महिलाओं को मिला रोजगार

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दिलकश ने डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लिया और इसके बाद स्थानीय महिलाओं को भी प्रशिक्षण देना शुरू किया। आर्टिफिशियल ज्वेलरी, साड़ी डिजाइनिंग और कपड़ों से जुड़े कार्यों को रोजगार का माध्यम बनाया गया। ‘खुशी’ स्वयं सहायता समूह के जरिए शुरू हुआ ज्वेलरी का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ा और वर्तमान में 100 से अधिक परिवार कपड़ा एवं ज्वेलरी डिजाइनिंग के काम से जुड़े हुए हैं।

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दिल्ली और सूरत से सीखा हुनर, गांव में बांटा

वर्ष 2000 में सलई गांव में आए एक विदेशी दल के माध्यम से महिलाओं को कपड़ों और आभूषणों की डिजाइनिंग का प्रशिक्षण मिला था। इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दिलकश ने दिल्ली और सूरत जाकर प्रशिक्षण हासिल किया। गांव लौटने के बाद उन्होंने सीखे हुए हुनर को अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें घर से काम करने और आय अर्जित करने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया।

महिला सशक्तिकरण के लिए मिले 22 से अधिक सम्मान

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए दिलकश जहां को 22 से अधिक पुरस्कार मिलने की जानकारी है। वर्ष 2015 में विश्व व्यापार मेले में उन्हें प्रदेश की अग्रणी महिला उद्यमी श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला। उनके काम का फोकस केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं को बाजार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी रहा।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में मिली अहम जिम्मेदारी

11 मार्च 2024 को दिल्ली में आयोजित ‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ कार्यक्रम में हिंदीभाषी क्षेत्र से दिलकश जहां का चयन कार्यक्रम संचालन के लिए किया गया था। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में संचालन की जिम्मेदारी मिलना उनके सामाजिक और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल रहा।

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ट्रेड शो में उत्पादों को मिला बड़ा बाजार

ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिलकश ने आर्टिफिशियल ज्वेलरी और होम डेकोर उत्पादों का स्टॉल लगाया। यहां मुंबई, फरीदाबाद और दिल्ली के कारोबारियों से लाखों रुपये के ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई। इससे गांव में तैयार उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिला और महिलाओं के बनाए उत्पादों को नई पहचान मिली।

अब 1500 परिवारों की बेटियों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य

दिलकश जहां अब अपने काम का दायरा और विस्तृत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य करीब 1500 परिवारों की बेटियों को रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। उनका कहना है कि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, काम और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आठवीं के बाद की चुनौती से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

दिलकश जहां की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष के बीच अवसर तलाशने की यात्रा भी है। जिस दौर में पढ़ाई जारी रखना चुनौती बना हुआ था, उसी दौर से निकलकर उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और बाद में अपने अनुभव को दूसरी बेटियों और महिलाओं के लिए अवसरों में बदलने का प्रयास किया। हौसलों के सामने परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लगातार सीखने और आगे बढ़ने का संकल्प नई राह बनाने की ताकत देता है।