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गांवों की सफाई व्यवस्था पर डीएम सख्त, कचरा निस्तारण से लेकर पंचायत भवनों तक पर बढ़ी निगरानी

सामुदायिक शौचालयों की बदहाल व्यवस्था नहीं चलेगी, हर पंचायत में आरआरसी और ई-रिक्शा के प्रभावी संचालन के निर्देश; पंचायत भवनों के सुदृढ़ीकरण के साथ गांव-गांव पुस्तकालयों पर प्रशासन का जोर

हापुड़। गांवों की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर अब जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायतों में संचालित स्वच्छता और जनसुविधाओं की व्यवस्थाओं की पड़ताल करते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि गांवों में योजनाओं का क्रियान्वयन केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सामुदायिक शौचालयों की सफाई से लेकर घरों से निकलने वाले कचरे के उचित निस्तारण तक हर व्यवस्था धरातल पर प्रभावी दिखाई देनी चाहिए। बैठक में ग्राम पंचायतों की स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, आरआरसी, ई-रिक्शा, पंचायत भवन और पुस्तकालयों से जुड़े कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई।

सामुदायिक शौचालय बने हैं तो उपयोगी भी दिखने चाहिए

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराकर जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। इनके नियमित संचालन, साफ-सफाई और रखरखाव पर लगातार निगरानी जरूरी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीणों को स्वच्छ एवं उपयोगी सुविधा उपलब्ध हो। प्रशासन का जोर ऐसी व्यवस्थाओं पर है, जिनका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल सके।

कचरे के ढेर नहीं, व्यवस्थित निस्तारण चाहिए

गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर भी जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाई। प्रत्येक ग्राम पंचायत में आरआरसी यानी रिसोर्स रिकवरी सेंटर और ई-रिक्शा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। घरों और सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाले कचरे के संग्रहण से लेकर उसके उचित निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्वच्छता व्यवस्था तभी सफल मानी जाएगी, जब कचरा सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा दिखाई न दे।

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आरआरसी की व्यवस्था सिर्फ कागजों में न रहे

बैठक में आरआरसी के संचालन को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कचरा प्रबंधन की निर्धारित व्यवस्था वास्तव में गांवों में काम करती दिखाई दे। ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा संग्रहण और उसके बाद उचित प्रक्रिया के तहत निस्तारण की व्यवस्था को नियमित एवं प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया गया।

पंचायत भवनों को बनाया जाएगा ग्रामीण व्यवस्था का मजबूत केंद्र

ग्राम पंचायतों के पंचायत भवनों को सुदृढ़ और व्यवस्थित करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए। जिलाधिकारी ने आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि पंचायत भवन ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक कार्यों और जनहित से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रभावी केंद्र के रूप में काम कर सकें। पंचायत भवनों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं पर भी संबंधित अधिकारियों को ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

गांवों में पुस्तकालय, युवाओं के लिए बढ़ेगी अध्ययन की सुविधा

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और अध्ययन का माहौल मजबूत करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत स्तर पर पुस्तकालयों की स्थापना और उनके नियमित संचालन पर भी प्रशासन का जोर रहा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पुस्तकालय केवल भवन या कक्ष तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के लिए वास्तविक अध्ययन सुविधा के रूप में विकसित किए जाएं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर अध्ययन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

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सफाई व्यवस्था की असली ताकत होगी जनभागीदारी

जिलाधिकारी ने स्वच्छता अभियान में ग्रामीणों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें गांवों को साफ रखने की मुहिम से जोड़ा जाए। घरों से निकलने वाले कचरे के उचित संग्रहण और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाने को लेकर भी जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों की मौजूदगी में तय हुई आगे की दिशा

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला परियोजना प्रबंधक, जिला समन्वयक, लेखाकार, सहायक विकास अधिकारी पंचायत सहित पंचायती राज विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन जिला पंचायत राज अधिकारी शिव बिहारी शुक्ला ने किया। इस दौरान ग्राम पंचायतों की स्वच्छता व्यवस्था, सामुदायिक शौचालयों, ठोस कचरा प्रबंधन, आरआरसी, ई-रिक्शा, पंचायत भवनों और पुस्तकालयों से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक से प्रशासन का संदेश साफ है कि ग्रामीण स्वच्छता और जनसुविधाओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को अब केवल आंकड़ों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं, बल्कि उनके जमीनी क्रियान्वयन के आधार पर परखा जाएगा। सामुदायिक शौचालयों की सफाई, कचरे का नियमित संग्रहण एवं निस्तारण, आरआरसी और ई-रिक्शा का संचालन तथा पंचायत भवनों और पुस्तकालयों की उपयोगिता पर प्रभावी निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया गया है।