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हापुड़ में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा अभियान: ‘गलत स्पर्श हो या ऑनलाइन उत्पीड़न, चुप्पी नहीं—तुरंत उठाएं आवाज’

न्यायिक अधिकारी ने विद्यार्थियों को समझाया पॉक्सो का सुरक्षा कवच, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श से लेकर साइबर उत्पीड़न तक दी अहम जानकारी

हापुड़। बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा देने और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से जिले में पॉक्सो अधिनियम-2012 को लेकर विशेष विधिक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अजय कुमार सिंह प्रथम के निर्देशन में विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।

टियाला के विद्यालय में विद्यार्थियों को कानून की पाठशाला

इसी क्रम में एक अक्टूबर 2026 को अपर सिविल जज (जू.डि.) प्रथम श्रीमती पिंकी वर्मा ने कंपोजिट विद्यालय टियाला में विधिक जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना जाता है। बच्चों से जुड़े लैंगिक अपराधों के मामलों में कानून विशेष संरक्षण का प्रावधान करता है।

सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की पहचान पर जोर

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार उन्हें असहज या अनुचित महसूस कराता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। किसी भी प्रकार के डर, दबाव या धमकी में आकर घटना को छिपाने के बजाय सहायता लेना जरूरी है।

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ऑनलाइन उत्पीड़न से बचने को भी किया जागरूक

बदलते डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी कार्यक्रम में विशेष चर्चा की गई। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल, साइबर उत्पीड़न और संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों से सावधान रहने की जानकारी दी गई। उन्हें समझाया गया कि किसी भी अनुचित संदेश, धमकी या दबाव की स्थिति में अकेले उसका सामना करने के बजाय माता-पिता, शिक्षक अथवा विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल जानकारी दें।

बाल विवाह और शिकायत प्रक्रिया की भी दी जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम में बाल विवाह सहित बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य कानूनी विषयों पर भी चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी अनुचित व्यवहार या अपराध की स्थिति में शिकायत करने के लिए उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। समय पर सूचना देने से संबंधित स्तर पर आवश्यक सहायता और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

पीड़ित बच्चे की पहचान की गोपनीयता पर भी जोर

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कार्यक्रम में बाल पीड़ित की पहचान को गोपनीय रखने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। इसका उद्देश्य बच्चों में कानून के प्रति विश्वास पैदा करना और उन्हें यह समझाना था कि अपराध की स्थिति में उनकी सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता को कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

10 अक्टूबर तक चलेगा अभियान का पहला चरण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में कार्यरत पीएलवी अशोक और निशा ने बताया कि पॉक्सो जागरूकता अभियान का प्रथम चरण एक अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को पॉक्सो कानून, उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और शिकायत से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।

बच्चों की सुरक्षा में परिवार और समाज की भी अहम भूमिका

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, विद्यालय, समाज और संबंधित संस्थाओं की सामूहिक भूमिका से ही बच्चों के लिए सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण तैयार किया जा सकता है। जागरूकता अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में सही समय पर उचित कदम उठाने के लिए सक्षम बनाना है।