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धार्मिक आयोजन में इस बार दिखेगा नया रंग, रामलीला के साथ काली अखाड़ा बनेगा खास आकर्षण

पिलखुवा, हापुड़:पिलखुवा में इस वर्ष होने वाली रामलीला को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। धार्मिक मंचन के साथ आयोजन में कई नए कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। अधौड़ी वालों की धर्मशाला में श्रीरामलीला कमेटी की बैठक आयोजित कर कार्यक्रमों की रूपरेखा, मंचन, सुरक्षा, दर्शकों की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर पदाधिकारियों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया। आयोजन को व्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए जिम्मेदारियां भी तय की गईं।

एक अक्तूबर से शुरू होगा धार्मिक आयोजनों का सिलसिला कमेटी के अनुसार एक अक्तूबर से रामलीला मंचन की शुरुआत होगी और 22 अक्तूबर तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया जाएगा। आयोजन में श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रमों के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए तैयारियों को चरणबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।पहली बार खुर्जा का काली अखाड़ा दिखाएगा करतब इस बार रामलीला आयोजन में नया आकर्षण खुर्जा का काली अखाड़ा रहेगा। पहली बार शामिल किए जा रहे इस कार्यक्रम को लेकर कमेटी में विशेष उत्साह है। धार्मिक आयोजन के बीच अखाड़े की प्रस्तुति दर्शकों के लिए अलग अनुभव देने वाली होगी।

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इसके अलावा रासलीला का आयोजन भी रामलीला के बाद कराया जाएगा। कमेटी पदाधिकारियों के अनुसार नए कार्यक्रमों से आयोजन की भव्यता बढ़ेगी और दर्शकों को धार्मिक संस्कृति से जुड़े विभिन्न रंग एक ही मंच पर देखने को मिलेंगे।देवी जी के पंखे से होगी शुरुआत, मंच पर आएंगे धार्मिक प्रसंग मेला अधिकारी अखिलेश मित्तल ने बताया कि पहले दिन देवी जी का पंखा और रावण हुकुम का मंचन प्रस्तावित है।

इसके बाद शिव विवाह और भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। सीता जन्म, धनुष यज्ञ और परशुराम संवाद जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग भी मंचन का हिस्सा रहेंगे। प्रत्येक कार्यक्रम को निर्धारित क्रम के अनुसार प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है, जिससे दर्शकों को कथा का क्रम आसानी से समझ में आए।राम बारात से वनगमन तक मंचन में दिखेगी धार्मिक आस्था आयोजन के दौरान श्रीराम बारात का कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।

इसके बाद राम वनगमन, निषाद मिलन और केवट प्रसंग जैसे दृश्यों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। मंचन को प्रभावी बनाने के लिए कमेटी स्तर से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों के बीच समन्वय बनाकर सभी कार्यक्रमों को निर्धारित समय पर कराने की योजना तैयार की गई है।सीता हरण से लंका दहन तक बढ़ेगा मंचन का रोमांच रामलीला के आगे के कार्यक्रमों में भरत मिलन, सीता हरण, हनुमान-सीता मिलन और लंका दहन जैसे प्रसंगों का मंचन किया जाएगा।

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लक्ष्मण शक्ति का प्रसंग भी प्रस्तुत किया जाएगा। इन कार्यक्रमों को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। प्रमुख प्रसंगों के मंचन के दौरान धार्मिक भावनाओं के अनुरूप वातावरण बनाए रखने और दर्शकों के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी बैठक में विशेष चर्चा की गई।15 अक्तूबर को रावण वध, अगले दिन होगा राजतिलक कार्यक्रम के अनुसार 15 अक्तूबर को रावण वध का मंचन किया जाएगा।

इसके अगले दिन 16 अक्तूबर को भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने और राजतिलक का मंचन होगा। इसके साथ ही रामलीला के प्रमुख प्रसंगों का समापन होगा और आगे रासलीला के आयोजन की शुरुआत की जाएगी। रामलीला के अंतिम प्रमुख प्रसंगों को लेकर भी कमेटी की ओर से आवश्यक तैयारियां पूरी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।व्यवस्थाओं को लेकर कमेटी ने तय की जिम्मेदारियां बैठक में आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, दर्शकों की सुविधा, मंच व्यवस्था, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य जरूरी इंतजामों को समय से पूरा कराने पर चर्चा हुई।

कमेटी पदाधिकारियों ने कहा कि धार्मिक आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी की जाएंगी। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखने और कमियों को समय रहते दूर करने पर भी जोर दिया गया।