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रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष योजना की समीक्षा: पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को शीघ्र सहायता दिलाने पर जोर

हापुड़। महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों एवं हिंसा के मामलों में पीड़ितों को त्वरित राहत, आर्थिक सहायता और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी कविता मीना एवं पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने की।

बैठक में योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रकरणों, क्षतिपूर्ति वितरण की प्रगति, लंबित मामलों के निस्तारण, ई-पोर्टल पर अपलोडिंग की स्थिति तथा पुलिस और चिकित्सा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की गई।समीक्षा बैठक के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी ने योजना की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के तहत जघन्य अपराधों, यौन हिंसा, एसिड अटैक, मानव तस्करी, बाल अपराध और अन्य गंभीर घटनाओं से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाती है।

यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और पीड़ितों को समय पर सहायता मिलती है।बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा योजना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष अब तक प्रदेश भर में 1250 पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को कुल 41.75 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।

अधिकारियों ने बताया कि शासन की मंशा है कि किसी भी पात्र पीड़िता को सहायता राशि के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा न करनी पड़े और सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।जिलाधिकारी कविता मीना ने समीक्षा के दौरान संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि योजना के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक प्रकरण का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि नोडल पुलिस अधिकारी द्वारा एफआईआर की प्रति तथा नोडल चिकित्सा अधिकारी द्वारा मेडिको-लीगल रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपलोड की जाए, ताकि सहायता राशि स्वीकृत होने की प्रक्रिया में किसी प्रकार का विलंब न हो।उन्होंने कहा कि कई बार आवश्यक दस्तावेज समय पर अपलोड न होने के कारण पात्र पीड़िताओं को सहायता मिलने में देरी होती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र महिला या बालिका योजना के लाभ से वंचित न रहे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर उन्हें शीघ्रता से निस्तारित किया जाए।पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने भी अधिकारियों से कहा कि महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जाए तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस, चिकित्सा विभाग और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, जिससे पीड़ितों को समय पर राहत और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।बैठक में यह भी जोर दिया गया कि केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं के पुनर्वास, सुरक्षा और सामाजिक पुनर्स्थापन पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।